Tuesday, 3 October 2017

काला पीलिया का देसी इलाज

1. दो छुहारे, बादाम की 10 गिरी और छोटी इलायची के कुछ दाने ले और रात को इन सबको मिलाकर मिट्टी के किसी बर्तन में भिगो कर रख दे और सुबह पानी में से इस मिश्रण को निकाल कर मिश्री और थोड़ा ताजा मक्खन मिलाकर एक मिश्रण तैयार कर ले। कुछ दिन लगातार इस मिश्रण का सेवन करने पर पीलिया ठीक होने लगता है और इस उपाय से पेट की गर्मी का इलाज भी होता है। इस देशी नुस्खे को करते वक़्त कोई गरम चीज़ खाने से बचे।

2. थोड़ी कच्ची ईमली रात को पानी में रखे और सुबह भीगी हुई ईमली को उसी पानी में पीस ले और पानी छान ले। इस पानी में काला नमक और थोड़ी काली मिर्च मिला कर पिए। इस उपाय से एक से दो हफ्ते में पीलिया ठीक होने लगेगा।

3. नीम के पत्तों का एक चम्मच रस दिन में दो बार मरीज को पिलाने से लिवर की कमजोरी खत्म होती है। इस देशी नुस्खे से काले पीलिया में भी सुधार आता है।

4. फूली हुई फिटकरी 10 ग्राम और दही 250 ग्राम मिलाकर प्रतिदिन दो बार खाए। छाछ और दही का सेवन अधिक करे।

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पीलिया की आयुर्वेदिक दवा और उपचार

पंसारी से पीपल की जड़ मिल जाएगी। इस जड़ के तीन नग पूरे दिन के लिए पानी में भीगने के लिए रखे और जब ये फूल जाए तब पानी से इसे निकाल कर इसमें पीसी हुई काली मिर्च, काला नमक सुर नींबू का रस मिलाकर हर रोज सेवन करे। इस जड़ का एक नग हर रोज बढ़ाये और दस होने पर इसे बंद कर दे।  इस उपाय को निरंतर करने पर एक हफ्ते में ही ही पीलिया से आपको राहत मिलने लगेगी। पीलिया का उपचार करने के साथ साथ इस आयुर्वेदिक नुस्खे से पुराना बुखार और पुरानी क़ब्ज़ से भी छुटकारा मिलता है।

सफेद मूसली के चूर्ण की सेवन विधि

सफेद मूसली आयुर्वेद में एक बृहण और बल्य औषधि है जिसका  मतलब है यह शरीर को बल और ऊर्जा प्रदान करती है यह शरीर के सामर्थ्य को बढ़ाती है और शरीर के लिए उत्तम पोषक औषधि है ।

यह पचने में भारी और शीतवीर्य आयुर्वेदिक हर्ब है यह 
 शक्ति की वृद्धि करती है और रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ाती है इस का प्रयोग पुरुषों में अधिक किया जाता है क्योंकि यह मुख्यतः पुरुषों की शक्ति और आंतरिक बल को स्थिर करने वाली व बढ़ाने वाली जड़ी बूटी है  यह शुक्रजनन, बाजीकर और रसायन है यह शुक्र की वृद्धि करती है और इस को गाढ़ा बनाती है। इसके अतिरिक्त यह मांसपेशियों को शक्ति प्रदान करने के लिए प्रभावी है।

सफ़ेद मुसली का उपयोग :मुख्य रूप से सफेद मूसली की मूल का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है इसके बीजों का भी प्रयोग होता है आयुर्वेदिक में मुख्य रूप से बल्य और बाजीकरण के लिए जड़ों का ही व्यवहार प्रचलित है यह मूसली पाक का मुख्य घटक है जो इसी मकसद के लिए प्रयोग किया जाता है।

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रासायनिक संरचना : 

मूसली जड़ी बूटी की गांठ वाली जड़ों में ये तत्व पाए जाते हैं जेसे अल्कालोइड्स कार्बोहाईड्रेट प्रोटीन फाइबर सैपोनिन्स मूसली की जड़ों विटामिनयो और खनिजो से भरपूर है  इस में कैल्शियम पोटेशियम और मैग्नीशियम होते है।

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मात्रा : 

सफेद मूसली चूर्ण की औषधीय मात्रा हर व्यक्ति में उम्र शरीर की ताकत और भूख आदि पर निर्भर करती है सफेद मूसली की सामान्य औषधीय मात्रा व खुराक इस प्रकार है बच्चे 25 से 50 मिलीग्राम प्रति किलो वजन अनुसार लेकिन एक बार में 1 ग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए किशोर 13 से वर्ष 1.5 से 2 ग्राम वयस्क 19 से 60 वर्ष 3 से 6 ग्राम वृद्धावस्था 60 वर्ष से ऊपर 2 से 3 ग्राम अधिकतम ।

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सेवन विधि: 

सुबह और शाम भोजन के 2 घंटे बाद दिन में कितनी बार लें 2 बार अनुपान गुनगुने दूध के साथ उपचार की अवधि कम से कम 3 महीने चिकित्सक की सलाह लें यदि बतायी गयी औषधीय मात्रा से भूख में कमी हो तो इसकी मात्रा और कम कर लेनी चाहिए इसकी उतनी मात्रा ले जो आसानी से पच जाये।

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दुष्प्रभाव : 

यदि सफेद मूसली का प्रयोग व सेवन निर्धारित मात्रा में चिकित्सा पर्यवेक्षक के अंतर्गत किया जाए तो सफेद मूसली के कोई दुष्परिणाम नहीं मिलते। यह पचने में भारी है और अधिक मात्रा में यह भूख मार सकती है। सफेद मूसली मुख्य रूप से वात और पित्त दोष पर काम करता है और कफ दोष को यह बढ़ाता है इसलिए इसका प्रयोग कफज विकारो और मोटापे में नहीं करना चाहिए।

Sunday, 1 October 2017

शरीर के ल‍िए बहुउपयोगी चूर्ण -


250 ग्राम मैथीदाना
100 ग्राम अजवाईन
50 ग्राम काली जीरी

  उपरोक्त तीनो चीजों को साफ-सुथरा करके हल्का-हल्का सेंकना(ज्यादा सेंकना नहीं) तीनों को अच्छी तरह मिक्स करके मिक्सर में पावडर बनाकर डिब्बा-शीशी या बरनी में भर लेवें ।
रात्रि को सोते समय चम्मच पावडर एक गिलास पूरा कुन-कुना पानी के साथ लेना है। 
गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है। 
यह चूर्ण सभी उम्र के व्यक्ति ले सकतें है।
चूर्ण रोज-रोज लेने से शरीर के कोने-कोने में जमा पडी गंदगी(कचरा) मल और पेशाब द्वारा बाहर निकल जाएगी । 
पूरा फायदा तो 80-90 दिन में महसूस करेगें, जब फालतू चरबी गल जाएगी, नया शुद्ध खून का संचार होगा । चमड़ी की झुर्रियाॅ अपने आप दूर हो जाएगी। शरीर तेजस्वी, स्फूर्तिवाला व सुंदर बन जायेगा ।
‘‘फायदे’’
1. गठिया दूर होगा और गठिया जैसा जिद्दी रोग दूर हो जायेगा ।
2. हड्डियाँ मजबूत होगी ।
3. आॅख का तेज बढ़ेगा ।
4. बालों का विकास होगा।
5. पुरानी कब्जियत से हमेशा के लिए मुक्ति।
6. शरीर में खुन दौड़ने लगेगा ।
7. कफ से मुक्ति ।
8. हृदय की कार्य क्षमता बढ़ेगी ।
9. थकान नहीं रहेगी, घोड़े की तहर दौड़ते जाएगें।
10. स्मरण शक्ति बढ़ेगी ।
11. स्त्री का शारीर शादी के बाद बेडोल की जगह सुंदर बनेगा ।
12. कान का बहरापन दूर होगा ।
13. भूतकाल में जो एलाॅपेथी दवा का साईड इफेक्ट से मुक्त होगें।
14. खून में सफाई और शुद्धता बढ़ेगी ।
15. शरीर की सभी खून की नलिकाएॅ शुद्ध हो जाएगी ।
16. दांत मजबूत बनेगा, इनेमल जींवत रहेगा ।
17. नपुसंकता दूर होगी।
18. डायबिटिज काबू में रहेगी, डायबिटीज की जो दवा लेते है वह चालू रखना है। इस चूर्ण का असर दो माह लेने के बाद से दिखने लगेगा । 
जीवन निरोग,आनंददायक, चिंता रहित स्फूर्ति दायक और आयुष्ययवर्धक बनेगा 
जीवन जीने योग्य बनेगा ।

परहेज- तम्‍बाकू, गुटखा,धुम्रपान,अध‍िक म‍िठाई ,मांसाहार तली वस्‍तुऍ आद‍ि

प्रयोग विधी- रात्रि को सोते समय एक चम्मच पाउडर एक गिलास पूरा गुनगुने  पानी के साथ लेना है। गरम पानी के साथ ही लेना अत्यंत आवश्यक है लेने के बाद कुछ भी खाना पीना नहीं है।

इसके अलावा मोहनजी पंसारी हर्बल प्रोडक्ट कं का "संजिवनी चूर्ण " का प्रयोग कर सकते है जो  कि मेथीदाना, काला‍ज‍ीरी और अंजवायन से बना हुआ है,  यह पूर्णतः आयुर्वेद‍िक औषधी है ,इसका कोई साइड इफेक्‍ट नहीं है ।