Thursday, 6 October 2016

⁠⁠⁠मूत्र पथ संक्रमण

⁠⁠⁠मूत्र पथ संक्रमण के लक्षण आम और आसानी से पहचानने योग्य हैं। इनमें पेशाब के दौरान दर्द, बार-बार पेशाब लगना, पेशाब के दौरान जलन, बुखार, मतली और लोअर बैक में दर्द शामिल हैं। मूत्र पथ के संक्रमण वाले व्यक्ति को घर बैठे अच्छी खासी परेशानी हो सकती है। वैसे तो यह समस्‍या एंटीबॉयोअिक दवाएं लेने से सही हो जाती है। लेकिन इसके कुछ घरेलू उपचार भी हैं। इस तरह के संक्रमण के दौरान खूब पानी, जूस, सूप, पीना चाहिए। इससे मूत्र प्रवाह बढ़ाता है और किसी भी संक्रमण संकुचन की संभावना कम होती है। इसके अलावा, मूत्र को कभी रोकने कोशिश नहीं करनी चाहिए और जब आए तब ही कर लेना चाहिए।

महिलाओं को गर्मी और बरसात के मौसम के दौरान विशेष रूप से कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। यूटीआई के सबसे सामान्य कारणों में आंत्र है कि बैक्टीरिय त्वचा पर रहता है और मूत्र पथ में फैल जाता है। ये बैक्टीरिया ऊपर की तरफ बढ़ते हैं और मूत्राशय में संक्रमण का कारण बन सकते है। इसे रोकने के लिये आइये जानते हैं कुछ प्राकृतिक उपचार-



घरेलू उपचार-
1. विटामिन सी युक्‍त जूस पीजिये जैसे, अनानास, सिट्रस फ्रूट वाले फल जैसे, नींबू, मुसम्‍मी,संतरा आदि। पानी पीना इसका सबसे अच्‍छा उपचार हो सकता है। खूब सारा पानी पियें जिससे बैक्‍टीरिया का नाश हो सके।
2. इंफेक्‍शन के समय कॉफी, टी और चॉकलेट को तो हाथ न लगाएं। दालचीनी, यूवीए उर्सी, बूचा चाय की पत्तियां, हपूशाा आदि हर्ब अच्‍छे घरेलू उपचार हैं।
3. जौ का पानी, नारियल पानी और मठ्ठा भी सबसे अच्छा समाधान हैं। जौ का पानी पेट में एसिड की मात्रा को घटा कर पेट को शांति देता है और जलन को कम करता है।
4. एक जड़ी बूटी होती है जिसका नाम इचीनेशिया होता है, जो कि इंफेक्‍शन फैलाने वाले बैक्‍टीरिया का नाश करता है। तो ऐसे में इस हर्ब की चाय पीने से यह बीमारी पूरी तरह से सही हो सकती है। कोशिश करें कि इस चाय में बिल्‍कुल भी चीनी न मिलाएं।

5. एक प्रकार की सब्जी, दारुहल्दी और लहसुन बैक्‍टीरिया का नाश कर सकते हैं। इसका एक गिलास जूस पीने से रोग से मुक्‍ती मिल सकती है। इससे मूत्राशय में हो रही जलन खतम हो सकती है।

Wednesday, 5 October 2016

अगर दांत में कीड़े लग जाए तो

बचपन से सिखाया जाता है कि दिन में दो बार ब्रश करना चाहिए ताकि आपके दांत सही रहें, लेकिन कभी-कभी थोड़ी लापरवाही के चलते दांतों में कीड़े लग जाते हैं। अगर दांत में कीड़े लग जाए तो किसी भी व्यक्ति के लिए कोई भी चीज खानी मुश्किल हो जाती है। ऐसे में आपको डॉक्टर के पास जाना पड़ता है जिसका उपाय होता है या तो दांत निकाला जाए या फिर वहां पर कीड़ा हटाने के बाद वहां पर फिलिंग की जाए।

लाइव हिन्दुस्तान आपको बताने जा रहा है कि दादी-नानी के नुस्खों से कैसे आप दांतों में लगे कीड़े को कैसे हटाया जा सकता है। इसके लिए आपको ज्यादा पैसे भी नहीं खर्च करने होंगे क्योंकि ये चीजे आपकों आसानी से घर में या उसके आसपास मिल जाएंगी। दांतों से कीड़ा हटाने या उससे छुटकारा पाने के क्या है छह तरीके जानने के लिए अगली स्लाइड पर जाएं….

पहला नुस्खा
पिसी हुई हल्दी और नमक को मिला ले। इसके बाद इसमें सरसों का तेल मिलाएं। तीनों के इस पेस्ट का दिन में दो से चार बार मंजन करें। ऐसे करने से दांतों के कीड़े मर जाते हैं।

दूसरा नुस्खा
लौंग का तेल रुई में भीगाकर कीड़े लगे दातों के खोखले भाग में लगाएं। इससे दांत के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।

तीसरा नुस्खा
फिटकरी, सेंधानमक और नौसादर बराबर मात्रा में लेकर बारीक पाउडर बना लें। इसके बाद सुबह-शाम दांतों और मसूड़ों पर मले।

चौथा नुस्खा
गर्म पानी में फिटकरी मिलाकर रोजाना कुल्ला करने से भी दांतों के कीड़े और बदबू खत्म हो जाती है।

पांचवां नुस्खा
बरगद (बड़) का दूध कीड़े वाले या सड़े हुए दांत पर लगाने से कीड़े मर जाते हैं

छठा नुस्खा
दालचीनी का तेल रूई में भरकर उस दांत में लगाए जिसमें दर्द हो रहा है। इससे दर्द में आराम मिलेगा और कीड़े भी नष्ट हो जाएंगे।

कब्ज (Constipation) परिचय~

➡ कब्ज रोग होने की असली जड़ भोजन का ठीक प्रकार से न पचना होता है। यदि पेट रोगों का घर होता है तो आंत विषैले तत्वों की उत्पति का स्थान होता है। यह बहुत से रोगों को जन्म देता है जिनमें कब्ज प्रमुख रोग होता है।

➡ कब्ज एक प्रकार का ऐसा रोग है जो पाचनशक्ति के कार्य में किसी बाधा उत्पन्न होने के कारण होता है। इस रोग के होने पर शारीरिक व्यवस्था बिगड़ जाती है जिसके कारण पेट के कई रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इस रोग के कारण शरीर में कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है। इस रोग के कारण कई प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं जैसे- अफारा, पेट में दर्द, गैस बनना, सिर में दर्द, हाथ-पैरों में दर्द, अपच तथा बवासीर आदि।


✅ कब्ज रोग का लक्षण~

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रोजाना मलत्याग नहीं होता है।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी जब मल का त्याग करता है तो उसे बहुत अधिक परेशानी होती है। कभी-कभी मल में गांठे बनने लगती हैं। जब रोगी मलत्याग कर लेता है तो उसे थोड़ा हल्कापन महसूस होता है।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद तथा मटमैली हो जाती है।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के पेट में गैस अधिक बनती है। पीड़ित रोगी जब गैस छोड़ता है तो उसमें बहुत तेज बदबू आती है।

➡ कब्ज के रोग से पीड़ित व्यक्ति के मुंह से भी बदबू आती रहती है।

➡ इस रोग में रोगी को बहुत कम भूख लगती है।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के सिर में दर्द भी होता रहता है।

➡ रोगी व्यक्ति की आंखों के नीचे कालापन हो जाता है तथा रोगी का जी मिचलाता रहता है।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को कई प्रकार के और भी रोग हो जाते हैं जैसे- मुंहासे निकलना, मुंह के छाले, अम्लता, चिड़चिड़ापन, गठिया, आंखों का मोतियाबिन्द तथा उच्च रक्तचाप आदि।


✅ कब्ज होने के कारण~

➡ तली हुई चीजों का अधिक सेवन करने के कारण कब्ज रोग हो जाता है।

➡ मल तथा पेशाब के वेग को रोकने से कब्ज रोग हो सकता है।

➡ ठंडी चीजे जैसे- आइसक्रीम, पेस्ट्री, चाकलेट तथा ठंडे पेय पदार्थ खाने से कब्ज रोग हो सकता है।

➡ दर्दनाशक दवाइयों का अधिक सेवन करने के कारण कब्ज रोग हो जाता है।

➡ व्यायाम तथा शारीरिक श्रम न करने के कारण भी कब्ज रोग हो जाता है।

➡ शरीर में खून की कमी तथा अधिक सोने के कारण भी कब्ज रोग हो जाता है।

➡ कम पानी पीने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।

➡ समय पर भोजन न करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।

➡ गलत तरीके से खान-पान के कारण भी कब्ज का रोग हो सकता है।

➡ मैदा तथा चोकर से बना भोजन खाने के कारण कब्ज का रोग हो सकता है।

➡ बासी भोजन का सेवन करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।

➡ तरल पदार्थों का सेवन अधिक करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।

➡ अधिक धूम्रपान तथा नशीली दवाइयों का प्रयोग करने के कारण भी कब्ज रोग हो सकता है।
 

✅ कब्ज रोग का प्राकृतिक
      चिकित्सा से उपचार

➡ कब्ज रोग का उपचार करने के लिए कभी भी दस्त लाने वाली औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए बल्कि कब्ज रोग होने के कारणों को दूर करना चाहिए और फिर प्राकृतिक चिकित्सा से इसका उपचार कराना चाहिए।

➡ कब्ज के रोग को ठीक करने के लिए चोकर सहित आटे की रोटी तथा हरी पत्तेदार सब्जियां चबा-चबाकर खानी चाहिए। अधिक से अधिक बिना पका हुआ भोजन करना चाहिए। अंकुरित अन्न का अधिक सेवन करने से रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है।

➡ रोगी व्यक्ति को अधिक से अधिक फलों का सेवन करना चाहिए ये फल इस प्रकार हैं- पपीता, संतरा, खजूर, नारियल, अमरूद, अंगूर, सेब, खीरा, गाजर, चुकन्दर, बेल, अखरोट,  आदि।

➡ नींबू पानी, नारियल पानी, फल तथा सब्जियों का रस पीने से कब्ज से पीड़ित रोगी को बहुत फायदा मिलता है।

➡ गेहूं का रस अधिक मात्रा में पीने से कब्ज से पीड़ित रोगी का रोग बहुत जल्दी ठीक हो जाता है।

➡ कच्चे पालक का रस प्रतिदिन सुबह तथा शाम पीने से कब्ज रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। इस प्रकार से उपचार करने से कब्ज रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है।

➡ रोगी व्यक्ति को रात के समय में 25 ग्राम किशमिश को पानी में भिगोने के लिए रख देना चाहिए।

➡ रोजाना सुबह के समय इस किशमिश को खाने से पुराने से पुराना कब्ज रोग ठीक हो जाता है।

➡ कब्ज से पीड़ित रोगी को सुबह तथा शाम 10-12 मुनक्का खाने से बहुत लाभ होता है।

➡ नीबू का रस गर्म पानी में मिलाकर रात के समय पीने से शौच साफ आती है।

➡ कब्ज के रोग को ठीक करने के लिए त्रिफला चूर्ण को प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।

➡ रोगी व्यक्ति को सुबह के समय में उठते ही 2-4 गिलास पानी पीना चाहिए और उसके बाद शौच के लिए जाना चाहिए।

➡ कब्ज का उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को अपने पेट पर 20 से 25 मिनट तक मिट्टी की या कपड़े की पट्टी करनी चाहिए। यह क्रिया प्रतिदिन करने से यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। इसके बाद रोगी व्यक्ति को कटिस्नान करना चाहिए तथा एनिमा क्रिया करके अपने पेट को साफ करना चाहिए।

➡ कब्ज से पीड़ित रोगी को सुबह के समय में खुली हवा में प्रतिदिन सैर के लिए जाना चाहिए।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को शाम के समय में हरे रंग की बोतल का सूर्यतप्त पानी पीना चाहिए।

➡ जिसके फलस्वरूप कब्ज रोग को ठीक होने में मदद मिलती है। इसके बाद ईसबगोल की भूसी ली जा सकती है। लेकिन इसमें कोई खाद्य पदार्थ नहीं होना चाहिए।

➡ रोगी व्यक्ति को मैदा, बेसन, तली-भुनी तथा मिर्च मसालेदार चीजों आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को भोजन करने के बाद लगभग 5 मिनट तक वज्रासन करना चाहिए। यदि सुबह के समय में उठते ही वज्रासन करे तो शौच जल्दी आ जाती है।

➡ कब्ज रोग को ठीक करने के लिए पानी पीकर कई प्रकार के आसन करने से कब्ज रोग ठीक हो जाता है- सर्पासन, कटि-चक्रासन, उर्ध्वहस्तोत्तोनासन, उदराकर्षासन तथा पादहस्तासन आदि।

➡ यदि किसी व्यक्ति को बहुत समय से कब्ज हो तो उसे सुबह तथा शाम को कटिस्नान करना चाहिए और सोते समय पेट पर गर्म सिंकाई करनी चाहिए और प्रतिदिन कम से कम 6 गिलास पानी पीना चाहिए।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को 1 चम्मच आंवले की चटनी गुनगुने दूध में मिलाकर लेने तथा रात को सोते समय एक गिलास गुनगुना पानी पीने से बहुत अधिक लाभ मिलता है।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रात के समय में तांबे के बर्तन में पानी को रखकर सुबह के समय में पीने से शौच खुलकर आती है और कब्ज नहीं बनती है।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह के समय में 2 सेब दांतों से काटकर छिलके समेत चबा-चबाकर खाना चाहिए। इससे रोगी का रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।

➡ सप्ताह में 1 बार गर्म दूध में 1 चम्मच एरण्डी का तेल मिलाकर पीने से कब्ज का रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

➡ कब्ज रोग से बचने के लिए जब व्यक्ति को भूख लगे तभी खाना खाना चाहिए।

➡ कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को अपने पेडू पर ठंडे पानी में भिगोया तौलिया कम से कम 8 मिनट तक रखना चाहिए जिसके फलस्वरूप कब्ज रोग जल्दी ठीक हो जाता है।