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Wednesday, 18 January 2017

चमत्कारीक जल कैसे बनतां है आइये जानते है*

चाहे बीमारी कोइ भी हो, कितनी भी पुरानी हो सिरफॅ 6-12 महिने तक इस जल का सेवन करने से आपका रोग हो जायेगा छूमंतर | आैर आपको ऐसा स्वास्थ प्रदान करेगा जो करोडो खचॅ करने बाद भी शायद न मिल पाये
चमत्कारीक जल कैसे बनतां है आइये जानते है*
➡ सुवणॅ    2 gms
➡ चांदी     2 gms
➡ ताम्र      4 gms
➡ पित्तल   2 gms
➡ कांस्य.   2 gms 
❇ इन सभी चीजो को सुनार को देकर सबको मिक्स करके रिंग बनवाले |
 ❇ इस रिंग को 500 ml पानी लेकर रात को  १० बजे इस रिंग को पानी मे भीगोकर रख दिजिये | सुबह प्रात 6 बजे इस पानी मे से रिंग को निकाल ले आैर पानी का सेवन करे |
निम्न लिखीत रोगो से बचातां है एवं यह रोग है तो असाधारण तरिके से रोगो को दूर करतां है|
 ❇ पेट के रोग, चमॅ रोग, कमजोरी , वियॅ की कमी, बांजपन, लिवर के रोग, दिमागी रोग, पागलपन, गढिया, आमवात, जोडो का ददॅ, सुजन, किडनी के रोग, दिमाग की नसों मे ब्लोकेज, हाटॅ ब्लोकेज, कफ वृद्धी, मेदरोग, शारीरिक कमजोरी, मंद कामेच्छा, शरीर मे खून की कमी, आयरन की कमी, लो ब्लड सरक्युलेशन, नीद की समस्या, पागलपन, दिल की बिमारी, पेट से जुडे हर रोग, टिबी, केन्सर, श्वास दमां, वगेरह रोगो मे यह प्रयोग रामबाण इलाज है |
❇ हमारे आयुॅवैद के विविध संहिता मे सुवणॅ , चांदी , ताम्र , कास्य, पित्तल के चमत्कारीक गुण बताये गये है | उसकी भस्म पचने मे भारी होती है जबकी यह जल बनाने से उन सभी के गुण इस पानी मे मिल जाते है एवं आसानी से पाचन भी हो जाते है |