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Thursday, 16 March 2017

पक्षाघात (लकवा) paralysis

पक्षाघात (लकवा) paralysis  प्रमाणिक और राम-बाण इलाज़।
पुरादेवऽसुरायुद्धेहताश्चशतशोसुराः।
हेन्यामान्यास्ततो देवाः शतशोऽथसहस्त्रशः।
जीवन मे चाहे धन, एश्वर्य, मान, पद, प्रतिष्ठा आदि सभी कुछ हो, परंतु शरीर मे बीमारी है तो सब कुछ बेकार है ओर जीवन भी नीरस है ऐसी ही एक बीमारी है पक्षाघात, जिससे पीड़ित व्यक्ति जीवनभर सारे परिवार पर बोझ बन जाता है।
पक्षाघात की पहचान :- जैसे किसी का मुह टेढ़ा हो जाना, आँख का टेढ़ा हो जाना, हाथ या पैर का टेढ़ा हो जाना, या शरीर किसी एक साइड से बिलकुल काम करना बंद कर दे, ये सामान्यतया पक्षाघात की पहचान है।
अगर मेरा कोई भाई बहिन पक्षाघात से पीड़ित है तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है। अगर शरीर का कोई अंग या शरीर दायीं तरफ से लकवाग्रस्त है तो उसके लिए व्रहतवातचिंतामणि रस (वैदनाथ फार्मेसी) की ले ले। उसमे छोटी-छोटी गोली (बाजरे के दाने से थोड़ी सी बड़ी) मिलेंगी। उसमे से एक गोली सुबह ओर एक गोली साँय को शुद्ध शहद से लेवें।
अगर कोई भाई बहिन बायीं तरफ से लकवाग्रस्त है उसको वीर-योगेन्द्र रस (वैदनाथ फार्मेसी) की सुबह साँय एक एक गोली शहद के साथ लेनी है।
अब गोली को शहद से कैसे ले………? उसके लिए गोली को एक चम्मच मे रखकर दूसरे चम्मच से पीस ले, उसके बाद उसमे शहद मिलकर चाट लें। ये दवा निरंतर लेते रहना है, जब तक पीड़ित स्वस्थ न हो जाए।
पीड़ित व्यक्ति को मिस्सी रोटी (चने का आटा) और शुद्ध घी (मक्खन नहीं) का प्रयोग प्रचुर मात्र मे करना है। शहद का प्रयोग भी ज्यादा से ज्यादा अच्छा रहेगा।
लाल मिर्च, गुड़-शक्कर, कोई भी अचार, दही, छाछ, कोई भी सिरका, उड़द की दाल पूर्णतया वर्जित है। फल मे सिर्फ चीकू ओर पपीता ही लेना है, अन्य सभी फल वर्जित हैं।

Wednesday, 12 October 2016

लकवा (Paralysis)

लकवा (Paralysis) को हिन्दी में पक्षाघात होना अथवा aलकवा मारना भी कहा जाता है। लकवा मारना मस्तिष्क में होने वाली एक प्रकार की बहुत ही गंभीर तथा चिंताजनक बीमारी है। शरीर के अन्य अंगों की तरह हमारे मस्तिष्क को भी लगातार रक्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है। रक्त में ऑक्सिजन तथा विभिन्न प्रकार के पोषकतत्व पाये जाते है जो हमारे मस्तिष्क को सही रूप से कार्य करने में काफी मदद करते है।

जब हमारे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रूक जाता है, तो एक या अधिक मांसपेशी या समूह की मांसपेशियाँ पूरी तरह से कार्य करने में असमर्थ हो जाती है। तब ऐसी स्थिती को पक्षाघात अथवा लकवा मारना कहते हैं। यह बीमारी प्रायः वृद्धावस्था में अधिक पाई जाती है। इस बीमारी में शरीर का कोई हिस्सा या आधा शरीर निष्क्रिय व चेतनाहीन होने लगता है। 

यह बीमारी होने की वजह से व्यक्ति की संवेदना शक्ति समाप्त हो जाती है, तथा वह चलने फिरने तथा शरीर में कुछ भी महसूस करने की क्षमता भी खोने लगता है। शरीर के जिस हिस्से पर लकवा मारता है, वह हिस्सा काम नहीं करता। पक्षाघात कभी भी कहीं भी तथा किसी भी शारीरिक हिस्से में हो सकता है।

 शरीर में लकवा मारने पर लक्षण
1) शरीर में अकडन आना।
 2) शरीर के एक विशेष हिस्से का बार बार सुन्न पड जाना।
 3) हाथ पैर उठाने तथा चलने में परेशानी होना।
 4) अत्याधिक सिरदर्द होना, चक्कर आना, कभी कभी व्यक्ति बेहोश होना है।
 5) सही रूप से बात न कर पाना, बात करने में तकलीफ होना।
6) पक्षाघात होने पर इसका दुष्प्रभाव आंखों पर भी पडने लगता है। तथा उस व्यक्ति को कई बार चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं। पक्षाघात होने पर आम तौर पर शरीर के एक हिस्से को लकवा मार जाता है। सिर्फ चेहरे, एक बांह, एक पैर, या शरीर और पूरे चेहरे के एक पहलू में लकवा मार सकता है। या दुर्बलता आ सकती है!

पक्षाघात के लिए किये जाने वाले उपाय :

1) 250 ग्राम रिफाइन्ड तेल में 50 से 60 ग्राम काली मिर्च मिलाकर कुछ देर तक पकायें। अब इस तेल से लकवे से प्रभावित अंग पर हल्के हल्के हाथों से लगायें। इस तेल को उसी समय बनाकर गुनगुना करके लगायें। इस इलाज को लगभग एक महीने तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

2) पक्षाघात के लिए 4 से 5 लहसुन की कलियों को पीसकर उसे 2 चम्मच शहद में मिलाकर चाट लें। इसके अलावा लहसुन की 4 से 5 कलियों को दूध में उबालकर उसका सेवन करने से रक्तचाप भी ठीक रहता है तथा लकवा से ग्रसित अंगों में भी हलचल होने लगती है।

3) देसी गाय के शुद्ध घी की 3 बूदों को हर रोज सुबह शाम नाक में डालने से माइग्रेन की समस्या खत्म हो जाती है। बाल झडना बंद हो जाते हैं तथा लकवा मारने के इलाज में भी बहुत फायदा होता है। 

4) आधा लीटर सरसों के तेल में 50 ग्राम लहसुन डालकर पका लें। अब इसे ठंडा करके इसे अच्छी तरह निचोड लें और एक डिब्बे में रख दें। रोजाना इस तेल से लकवा ग्रस्त प्रभावित क्षेत्र पर मालिश करने से काफी लाभ पहुँचता है।

5) कुछ दिनों तक लकवा से पीडित रोगी को खजूर को दूध में मिलाकर देने से लकवा ठीक होने लगता है।

6) सोंठ तथा उडद को पानी में मिलाकर हल्की आंच पर गर्म करके नियमित रूप से यह पानी रोगी को पिलाने से पक्षाघात में काफी लाभ पहुँचता है।

7) रोजाना, योगासन , प्राणायम तथा कपालभाती जैसी क्रिया नियमित करने से भी पक्षाघात में लाभ पहुँचता है।

Thursday, 8 September 2016

पक्षाघात,लकवा, paralysis

आयुर्वेदिक उपचार :-
⛔अगर रोगी नया ही है तो केवल अश्वगंधा का बारीक चूर्ण 6-6 gm सुबह शाम गऊ के दूध से लें और महानारायण तैल कि मालिश करे
⛔उपरोक्त 45 दिन करें
⛔bp के बढ़ जाने से जो पक्षाघात हो उसमें तेज दवाएँ कार्य नही करती और bp बढ़ता रहता है और रोगी परेशान ही होता रहता है
⛔लहसुन सिद्ध क्षीर का प्रयोग इस रोग में लाभकारी है ,इसके लिये 5-10 कलियाँ जिनका वजन 5-10 ग्राम हो छिलका उतार कर चटनी बना लें
➡गाय के गरम दूध में से 20ग्राम अलग निकाल कर रख लें उसमें ये चटनी मिला कर थोड़ी कुँजा मीश्री पीसी हुई पायें और पी लें ऊपर से बाकी दूध पी लें
 ➡रोजाना एक एक कली बढ़ा सकते है जब ये मात्रा 20-25 तक आ जाये फ़िर कम करते जायें
➡ य फ़िर लहसुन की और 250 ml दूध में उबालकर लगभग 125 ml दूध शेष रहने पर पीने को दें ,ये सुबह शाम दें
⛔नये रोगियों को केवल यही दूध को आहार के रुप में दें सकते है
⛔पुराने रोगियों को लघु आहार भी दिया जा सकता है
⛔विरेच्न के लिये रास्नादि क्वाथ में एरण्ड तैल दें
⛔जिन रोगियों को लहसुन से bp बड़े उन्हे सर्पगन्धा दें सकते है या मेरा नुस्खा नम्बर 24 प्रयोग कर सकते है

➡एकांगवीर रस की 1-1 गोली या 2-2 गोली सुबह शाम शहद या वातनाश्क क्वाथ से दें
➡ये रसायन बहुत तीक्ष्ण होता है इसलिए वात प्रधान या कफ वात प्रधान विकारों में विशेष लाभदायक है
➡ये ऊतेजित वायु को शांत करें और दूषित रक्त की सुधारता है
➡ह्रदय को बलवान बनाना इसका प्रधान कार्य है
➡दस्त साफ ना आने पर मेरा नुस्खा नम्बर 11 रात्रि को दें
➡वात रोगॊ में साथ साथ दशमुला रिष्ट ,दश्मूल क्वाथ ,रास्नादि क्वाथ दें
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8⃣चेहरे के लकवे के लिये :-
▶मूँग का आटा एक किलो और आक के जड़ की घास का चूर्ण एक किलो
(ध्यान दें यहाँ सिर्फ आक के जड़ में उगने वाले घास को लेने को कहा है ना कि आक को)दोनों को खरल कर मिला लें
          बाद में 200 gm मिश्रित आटे से रोटी बना लें इसको एक ही तरफ़ से सेक्ना है जिस और कच्ची रहे उस पर महा नारायण तैल + महा प्रसारनी तैल चुपड कर बाँध दें
      इसको हाथ पेर पर भी बाँध सकते है