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Tuesday, 6 March 2018

लकवा

अधरंग, पक्षाघात (लकवा)  की अयूर्वादिक दवा

किसी भी प्रकार लकवा  मुंह का लकवा, जीभ का लकवा, शरीर के एक तरफ का लकवा, सकम्प लकवा 
सभी के यह दवा कारगर है।

त्रिफला        100 ग्राम
अजवाइन     100  ग्राम
गिलोय         100 ग्राम
चरायता        50 ग्राम
करेला चुर्ण    50 ग्राम
तुसली पंचाग 50 ग्राम
सोंठ भुनी      50 ग्राम
अकरकरा      50 ग्राम
राई               50 ग्राम
सर्पगंधा        50 ग्राम
शुद्ध गुग्गुल   50 ग्राम
दालचीनी     50 ग्राम
कलौंजी       50 ग्राम
तिल काले    50 ग्राम
कालीमिर्च    50 ग्राम
अजमोद।    25 ग्राम
सौंफ           25 ग्राम
बबूना          25 ग्राम
बालछड़       25 ग्राम
नकछिनी      25  ग्राम 
जायफल       25 ग्राम
पिपली          25 ग्राम
काला नमक  50 ग्राम

सभी को चुर्ण बनाकर 300 ग्राम ताजा एलोवेरा रस 
में मिला ले। 5 दिन सायं में सुखाए।
आप तुरंत भी उपयोग कर सकते हैं।
इसका कोई साइड इफेक्ट्स नही है।
◆◆
सेवन विधि-1 चम्मच चुर्ण को 50 मिलीलीटर एलोवेरा
ताजा रस को 200 ग्राम मिलाकर सेवन करे।
दिन में 4 बार पहले 15 दिन ले।
15 दिन बाद दिन 3 बार ले।
फिर
15 दिन बाद 2 बार लेते रहे ।
90 दिन पूरा कोर्स करे।
पुराना लकवा भी ठीक होगा
★★
लकवा तेल बनाए

तिल का तेल।       50 ग्राम
निर्गुण्डी का तेल   50 ग्राम
अजवायन का तेल 50 ग्राम
बादाम का तेल       50 ग्राम
सरसों का तेल        50 ग्राम
विषगर्भ तेल           50 ग्राम
कलौजी तेल           50  ग्राम
10 ग्राम लहसुन,5 ग्राम बारीक पीसी हुई अदरक, 10 ग्राम काली उडद की दाल  50 ग्राम कपूर टिकी तेल में मिलाकर 5 मिनट तक गर्म करें। 

इस तेल से दिन में 5 बार मालिश करते रहे
■■■

      ★अयूर्वादिक लकवा दवा के फायदे★

लकवा रोग से पीड़ित रोगी को भूख कम लगती है, नींद नहीं आती है और रोगी की शारीरिक शक्ति कम हो जाती है।
यह भूख ,नींद औऱ शरीरक कमजोरी को दूर करेगी।
★★★
रोगी के शरीर के जिस अंग में लकवे का प्रभाव होता है, उस अंग के स्नायु अपना कार्य करना बंद कर देते हैं तथा उस अंग में शून्यता आ जाती है।
यह अयूर्वादिक दवा शून्यता को दूर कर अंग में हरक़त कायम करती।
★★★
                 ★लकवा रोगी ध्यान दे★

दवा के साथ आप इस बात पर ध्यान दे आप जल्दी बीमारी से छुटकारा पा लेंगे।
लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन नींबू पानी का एनिमा लेकर अपने पेट को साफ करना चाहिए और रोगी व्यक्ति को ऐसा इलाज कराना चाहिए जिससे कि उसके शरीर से अधिक से अधिक पसीना निकले।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन भापस्नान करना चाहिए तथा इसके बाद गर्म गीली चादर से अपने शरीर के रोगग्रस्त भाग को ढकना चाहिए और फिर कुछ देर के बाद धूप से अपने शरीर की सिंकाई करनी चाहिए।

★लकवा रोग से पीड़ित रोगी यदि बहुत अधिक कमजोर हो तो रोगी को गर्म चीजों का अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी की रीढ़ की हड्डी पर गर्म या ठंडी सिंकाई करनी चाहिए तथा कपड़े को पानी में भिगोकर पेट तथा रीढ़ की हड्डी पर रखना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को लगभग 10 दिनों तक फलों का रस नींबू का रस, नारियल पानी, सब्जियों के रस या आंवले के रस में शहद मिलाकर पीना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी का रोग जब तक ठीक न हो जाए तब तक उसे अधिक से अधिक पानी पीना चाहिए तथा ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। रोगी को ठंडे स्थान पर रहना चाहिए।
★लकवा रोग से पीड़ित रोगी को अपने शरीर पर सूखा घर्षण करना चाहिए और स्नान करने के बाद रोगी को अपने शरीर पर सूखी मालिश करनी चाहिए। मालिश धीरे-धीरे करनी चाहिए जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

★★★

      ★लकवा में इन चीजों से बचकर ही रहे★

इस रोग में नमक बहुत कम या बिलकुल न लेना अच्छा होता हैं. आरम्भ में भोजन में अन्न लेना भी ठीक नहीं. लकवा के रोगी को चाय, चीनी, तालीभुनि चीजें, नशे की चीजें, मसाले आदि उत्तेजक खाद्य से परहेज करना चाहिए. उसे ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए.

मानसिक उद्वेगों चिंता क्रोध तथा भय से बचना चाहिए. उसे न तो ठंडा पानी पीना चाहिए और न ठन्डे पानी से स्नान ही करना चाहिए. नया चावल, कुम्हड़ा, गूढ़, भैंस का दूध, उड़द की दाल, घुइया, भिंडी, रतालू, तरबूज, बासी ठंडी, चीजें, रात्रि जागरण, पाखाना-पेशाब रोकना, बर्फ का सेवन आदि इस रोग में वर्जित हैं.
★★★

★लकवा में दवा के साथ साथ उपवास करे ★
              डबल फायदा होगा

उपवास के दिनों में केवल जल अथवा कागजी नीबू का रस मिले जल के सिवा कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए. उन दिनों में थोड़ा-थोड़ा करके 2-3 सेर या अधिक पानी रोज जरूर पीना चाहिए. जिस दिन उपवास किया जाए, उस दिन शाम को और फिर उपवास काल में रोज सबेरे या शाम को दिन में एक बार सेर डेढ़ सेर गुन-गुने पानी का एनिमा जरूर लेना चाहिए.

अगर एक दिन का उपवास किया जाए तो दूसरे दिन फल खाने के बाद, तीसरे दिन भोजन किया जा सकता हैं. अगर तीन दिन का उपवास किया जाए तो चौथे दिन केवल फल या तरकारियों का सूप पांचवे दिन फल और छठे दिन सुबह शाम को फल और दोपहर को थोड़ी रोटी और सब्जी लेनी चाहिए. फिर साधारण भोजन पर आ जाना चाहिए।

Sunday, 26 March 2017

नमक

समुद्री नमक डाइबिटीज, लकवा जैसी बीमारियों से दे छुटकारा

  1. -समुद्री नमक डाइबिटीज, लकवा आदि गंभीर बीमारियों का भय रहता है लेकिन नमक होने बावजूद सैंधा नमक के सेवन से ये समस्याओं को दूर होती है.
  2. -सेंधा नमक हृदय के लिये अति उत्तम माना जाता है. रक्त विकार आदि के रोग जिसमें नमक खाने को मना हो उसमें भी इसका उपयोग किया जा सकता है.
  3. -चेहरे से झुर्रियों को दूर करने के लिए सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है. संधा नमक में नींबू और अदरक के रस के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाएं और कुछ ही दिनों में प्रभावशाली असर पाएं.
  4. -अगर नाखून पीले हो रहे हैं तो पीलीपन दूर करने के लिए सेंधा नमक के पानी में कुछ देर तक हाथ डुबोने से आपके पीले नाखून पीलेपन से निजात मिलेगी.

Wednesday, 12 October 2016

लकवा (Paralysis)

लकवा (Paralysis) को हिन्दी में पक्षाघात होना अथवा aलकवा मारना भी कहा जाता है। लकवा मारना मस्तिष्क में होने वाली एक प्रकार की बहुत ही गंभीर तथा चिंताजनक बीमारी है। शरीर के अन्य अंगों की तरह हमारे मस्तिष्क को भी लगातार रक्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है। रक्त में ऑक्सिजन तथा विभिन्न प्रकार के पोषकतत्व पाये जाते है जो हमारे मस्तिष्क को सही रूप से कार्य करने में काफी मदद करते है।

जब हमारे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रूक जाता है, तो एक या अधिक मांसपेशी या समूह की मांसपेशियाँ पूरी तरह से कार्य करने में असमर्थ हो जाती है। तब ऐसी स्थिती को पक्षाघात अथवा लकवा मारना कहते हैं। यह बीमारी प्रायः वृद्धावस्था में अधिक पाई जाती है। इस बीमारी में शरीर का कोई हिस्सा या आधा शरीर निष्क्रिय व चेतनाहीन होने लगता है। 

यह बीमारी होने की वजह से व्यक्ति की संवेदना शक्ति समाप्त हो जाती है, तथा वह चलने फिरने तथा शरीर में कुछ भी महसूस करने की क्षमता भी खोने लगता है। शरीर के जिस हिस्से पर लकवा मारता है, वह हिस्सा काम नहीं करता। पक्षाघात कभी भी कहीं भी तथा किसी भी शारीरिक हिस्से में हो सकता है।

 शरीर में लकवा मारने पर लक्षण
1) शरीर में अकडन आना।
 2) शरीर के एक विशेष हिस्से का बार बार सुन्न पड जाना।
 3) हाथ पैर उठाने तथा चलने में परेशानी होना।
 4) अत्याधिक सिरदर्द होना, चक्कर आना, कभी कभी व्यक्ति बेहोश होना है।
 5) सही रूप से बात न कर पाना, बात करने में तकलीफ होना।
6) पक्षाघात होने पर इसका दुष्प्रभाव आंखों पर भी पडने लगता है। तथा उस व्यक्ति को कई बार चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं। पक्षाघात होने पर आम तौर पर शरीर के एक हिस्से को लकवा मार जाता है। सिर्फ चेहरे, एक बांह, एक पैर, या शरीर और पूरे चेहरे के एक पहलू में लकवा मार सकता है। या दुर्बलता आ सकती है!

पक्षाघात के लिए किये जाने वाले उपाय :

1) 250 ग्राम रिफाइन्ड तेल में 50 से 60 ग्राम काली मिर्च मिलाकर कुछ देर तक पकायें। अब इस तेल से लकवे से प्रभावित अंग पर हल्के हल्के हाथों से लगायें। इस तेल को उसी समय बनाकर गुनगुना करके लगायें। इस इलाज को लगभग एक महीने तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें।

2) पक्षाघात के लिए 4 से 5 लहसुन की कलियों को पीसकर उसे 2 चम्मच शहद में मिलाकर चाट लें। इसके अलावा लहसुन की 4 से 5 कलियों को दूध में उबालकर उसका सेवन करने से रक्तचाप भी ठीक रहता है तथा लकवा से ग्रसित अंगों में भी हलचल होने लगती है।

3) देसी गाय के शुद्ध घी की 3 बूदों को हर रोज सुबह शाम नाक में डालने से माइग्रेन की समस्या खत्म हो जाती है। बाल झडना बंद हो जाते हैं तथा लकवा मारने के इलाज में भी बहुत फायदा होता है। 

4) आधा लीटर सरसों के तेल में 50 ग्राम लहसुन डालकर पका लें। अब इसे ठंडा करके इसे अच्छी तरह निचोड लें और एक डिब्बे में रख दें। रोजाना इस तेल से लकवा ग्रस्त प्रभावित क्षेत्र पर मालिश करने से काफी लाभ पहुँचता है।

5) कुछ दिनों तक लकवा से पीडित रोगी को खजूर को दूध में मिलाकर देने से लकवा ठीक होने लगता है।

6) सोंठ तथा उडद को पानी में मिलाकर हल्की आंच पर गर्म करके नियमित रूप से यह पानी रोगी को पिलाने से पक्षाघात में काफी लाभ पहुँचता है।

7) रोजाना, योगासन , प्राणायम तथा कपालभाती जैसी क्रिया नियमित करने से भी पक्षाघात में लाभ पहुँचता है।

Thursday, 8 September 2016

पक्षाघात,लकवा, paralysis

आयुर्वेदिक उपचार :-
⛔अगर रोगी नया ही है तो केवल अश्वगंधा का बारीक चूर्ण 6-6 gm सुबह शाम गऊ के दूध से लें और महानारायण तैल कि मालिश करे
⛔उपरोक्त 45 दिन करें
⛔bp के बढ़ जाने से जो पक्षाघात हो उसमें तेज दवाएँ कार्य नही करती और bp बढ़ता रहता है और रोगी परेशान ही होता रहता है
⛔लहसुन सिद्ध क्षीर का प्रयोग इस रोग में लाभकारी है ,इसके लिये 5-10 कलियाँ जिनका वजन 5-10 ग्राम हो छिलका उतार कर चटनी बना लें
➡गाय के गरम दूध में से 20ग्राम अलग निकाल कर रख लें उसमें ये चटनी मिला कर थोड़ी कुँजा मीश्री पीसी हुई पायें और पी लें ऊपर से बाकी दूध पी लें
 ➡रोजाना एक एक कली बढ़ा सकते है जब ये मात्रा 20-25 तक आ जाये फ़िर कम करते जायें
➡ य फ़िर लहसुन की और 250 ml दूध में उबालकर लगभग 125 ml दूध शेष रहने पर पीने को दें ,ये सुबह शाम दें
⛔नये रोगियों को केवल यही दूध को आहार के रुप में दें सकते है
⛔पुराने रोगियों को लघु आहार भी दिया जा सकता है
⛔विरेच्न के लिये रास्नादि क्वाथ में एरण्ड तैल दें
⛔जिन रोगियों को लहसुन से bp बड़े उन्हे सर्पगन्धा दें सकते है या मेरा नुस्खा नम्बर 24 प्रयोग कर सकते है

➡एकांगवीर रस की 1-1 गोली या 2-2 गोली सुबह शाम शहद या वातनाश्क क्वाथ से दें
➡ये रसायन बहुत तीक्ष्ण होता है इसलिए वात प्रधान या कफ वात प्रधान विकारों में विशेष लाभदायक है
➡ये ऊतेजित वायु को शांत करें और दूषित रक्त की सुधारता है
➡ह्रदय को बलवान बनाना इसका प्रधान कार्य है
➡दस्त साफ ना आने पर मेरा नुस्खा नम्बर 11 रात्रि को दें
➡वात रोगॊ में साथ साथ दशमुला रिष्ट ,दश्मूल क्वाथ ,रास्नादि क्वाथ दें
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8⃣चेहरे के लकवे के लिये :-
▶मूँग का आटा एक किलो और आक के जड़ की घास का चूर्ण एक किलो
(ध्यान दें यहाँ सिर्फ आक के जड़ में उगने वाले घास को लेने को कहा है ना कि आक को)दोनों को खरल कर मिला लें
          बाद में 200 gm मिश्रित आटे से रोटी बना लें इसको एक ही तरफ़ से सेक्ना है जिस और कच्ची रहे उस पर महा नारायण तैल + महा प्रसारनी तैल चुपड कर बाँध दें
      इसको हाथ पेर पर भी बाँध सकते है