Saturday, 4 March 2017

माइग्रेन दर्द को ठीक करने के लिए रामबाण घरेलु इलाज


सिरदर्द का रोग अर्धकपारी या फिर माइग्रेन एक बडी़ ही आम सी बीमारी है। कई लोग माइग्रेन से हफ्ते में एक या दो बार जरुर जूझते हैं। इसके रोगी वे होते हैं जिनके घरों में यह बीमारी सालों से चली आ रही हो। माइग्रेन का दर्द बड़ा ही तेज होता है जिसमें सिर के एक ही ओर तेज़ दर्द होने लगता है। यह दर्द कई अन्‍य बीमारियों की भी न्‍यौता देता है जैसे, चक्‍कर, उल्‍टी और थकान।

सभी जानते है की माइग्रेन में होने वाला सर दर्द कितना तकलीफ दायक होता है। यह दर्द अचानक ही शुरू होता है और अपने आप ही ठीक भी हो जाता है।

हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम और प्यार किसी भी दवा से ज्यादा असर करता है। इस दर्द में अगर सर, गर्दन और कंधो की मालिश की जाये तो यह इस दर्द से राहत दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। इसके लिए हलकी खुशबू वाले अरोमा तेल का प्रयोग किया जा सकता है।

माइग्रेन के दर्द को ठीक करने के कई तरीके हैं जैसे दवाइयां या फिर कुछ खाघ पदार्थ। क्‍या आप जानते हैं कि ऐसे कई फूड्स हैं जिन्‍हें खा कर आप माइग्रेन के दर्द से तुरंत ही छुटकारा पा सकते हैं। यदि आपको हर समय दवाइयों पर जिन्‍दा नहीं रहना है तो अब खाघ पदार्थ खा कर अपने जीवन की रक्षा करें..

- घरेलू उपचार से पाइए सिरदर्द से निजात

माइग्रेन को दूर भागने के घरेलु नुस्खे

हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां:
हरी पत्‍तेदार सब्‍जियां इन सब्‍जियों में मैग्निशियम अधिक होता है। यह रसायन माइग्रेन के दर्द को तुरंत गायब कर देगा। साबुत अनाज, समुंद्री जीव और गेहूं आदि में बहुत मैग्निशियम होता है।

अलसी का बीज:
इसमें भी खूब सारा ओमेगा 3 और फाइबर पाया जाता है। यह बीज सूजन को कम करती हैं।

कॉफी:
यह बात बिल्‍कुल सही है कि सिर दर्द में कॉफी पीने से वह गायब हो जाता है, तो माइग्रेन अटैक आने पर कॉफी का सेवन जरुर करें।

अदरक:
आयुर्वेद के अनुसार अदरक आपके सिर दर्द को ठीक कर सकता है। भोजन बनाते वक्‍त उसमें थोड़ा सा अदरक मिला दें और फिर खाएं।

दूध:
दूध वसा रहित दूध या उससे बने प्रोडक्‍ट्स माइग्रेन को ठीक कर सकते हैं। इसमें विटामिन बी होता है जिसे राइबोफ्लेविन बोलते हैं और यह कोशिका को ऊर्जा देती है। यदि सिर में कोशिका को ऊर्जा नहीं मिलेगी तो माइग्रेन दर्द होना शुरु हो जाएगा।

बाजरा:
इसमें फाइबर, एंटीऑक्‍सीडेंट और मिनरल पाये जाते हैं। तो ऐसे में दर्द पड़ने पर साबुत अनाज से बने भोजन का जरुर सेवन करें।

कुछ अन्य नुस्खे जिनकी मदद से आप माइग्रेन की बीमारी को दूर कर सकते है

एक तोलिये को गरम पानी में डुबाकर उस गरम तोलिये से दर्द वाले हिस्सों में मालिश करे। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गयी इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है। इसके लिए आप बर्फ के टुकड़ो का उपयोग भी कर सकते है।कपूर को घी में मिलकर सर पर हलके हाथों से मालिश करे। मक्खन में मिश्री मिलाकर सेवन करे।नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है।रात की नींद अच्छी तरह से ले। ताकि आप अच्छा महसूस कर सकेंगे।कोशिश करे की हर दिन सोने और उठने का एक नियमित समय हो जो लोग अनियमित तरीके से सोते है या फिर जिनके ऑफिस की ड्यूटी हमेशा बदलती रहती है उन्हें इस प्रकार की समस्या अधिक होती है.

डिप्रेशन या अवसाद

डिप्रेशन या अवसाद एक ऐसी मनो स्थिति जो हर इंसान ने अपने जीवन काल में किसी ना किसी रूप में कभी ना कभी अनुभव की है. और आज के इस तेज़-तर्रार युग में यह रोग सर्दी/ज़ुकाम की तरह हो रहा है. लगभग 10 % जनसंख्या में अवसाद रोग के रूप में पाया जाता है. विपरीत परिस्थितियों में मानसिक तनाव और विषाद महसूस करना तो प्राकृतिक ही है परंतु जब यह मानसिक स्थिति अनियंत्रित एवं दीर्घकालीन बन जाए और मानसिक विकृति बनकर रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करने लगे तब इसका इलाज करना आवश्यक हो जाता है.

यह रोग सभी उम्र अथवा श्रेणियों ( working, non-working, healthy, diseased) के व्यक्ति में उत्पन्न हो सकता है. और प्रसन्नता का विषय यह है की ये सुसाध्य रोग है. प्रभावशाली उपचार तथा मनोविशलेषन द्वारा यह रोगआसानी से ठीक हो जाता है.

अवसाद के कारण

हालाँकि यह रोग अब जनसंख्या में अत्यधिक व्याप्त होता जा रहा है परंतु अभी तक इसके मुख्य कारण के बारे में स्पष्टता नही मिल पाई है. वैज्ञानिक यही मानते हैं की यह रोग मनोवैज्ञानिक, आनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कारणों से उत्पन्न होता है.
कुछ लोगों में जन्म से ही अवसाद का रोग पाया जाता है. उनके मस्तिष्क में प्राकृतिक रसायनों  का असंतुलन रहता है. इसके अलावा दीर्घ रूप से बीमार लोग, वीडियो गेम्स या इंटरनेट का अधिक प्रयोग करने वाले, वे लोग जिनके प्रिय जनो की मृत्यु अथवा उनसे वियोग हो गया है इत्यादि व्यवहारिक कारणों से भी ग्रस्त व्यक्ति में अवसाद का रोग उत्पन्न हो जाता है.
प्रकृति के करीब रहने से इस रोग के होने की संभावना कम हो जाती है.

डिप्रेशन के लक्षण

आत्महत्या के विचार आनाआत्मविश्वास की कमी ख़ालीपन की भावनाअपराध भाव से ग्रस्त होना सामाजिक अलगाव और चिड़चिड़ा स्वाभाव निर्णय लेने में असमर्थता बहुत अधिक अथवा बहुत कम सोना

डिप्रेशन का उपचार

इस रोग के इलाज में psychotherapy और दवाई दोनो का ही उपयोग किया जाता है. मामूली अवसाद केवल मनोविशलेषन द्वारा निवृत्त हो जाता है. परंतु गहरे अवसाद का उपचार दवाइयों से किया जाता है. अवसाद-विरोधी दवाइयाँ मस्तिष्क में रसायनिक आसनतुलन को ठीक करती हैं तथा माना जात है इस प्रकार ये अवसाद को डोर कर देती हैं. परंतु आपको जानकार हैरानी होगी की इन दवाइयों के दुष्प्रभाव से रोगी में आत्महत्या के विचार आने लगते हैं या फेर घबराहत के दौरे पद सकते हैं . अन्य भी बहुत से साइड-एफेक्ट्स इन दवाइयों से होते हैं.
परंतु यदि आप आत्मबल को मज़बूत करने की चेष्टा करें तथा आयुर्वेदीय चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांतों को समझकर उपचार करें, तो इस रोग से मुक्ति प्राप्त कर स्वास्थ की ओर उन्मुख हुआ जा सकता है.

आयुर्वेद में इस रोग को विषाद रोग के नाम से जाना जाता है. इस अवस्था को रोग-उत्तेजक कारक भी कहा जाता है. यह मनोरोग धीरे धीरे शरीर में प्रविष्ट हो व्यक्ति की स्वस्थ, संवेदना, अनुभूति, ग्रहनशीलता, इन सबको प्रभावी करता है. जब विषाद रोग का रूप ले लेता है, तब इसका उपचार करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है.

अवसाद से मुक्त करने वाली आयुर्वेदीय औषधियाँ

अश्वगंधा (Withania somnifera): इस औषधि के प्रभाव से मन में नकारत्मक विचार आने बंद हो जाते हैं. यह तनाव, और शारीरिक कमज़ोरी को दूर करने वाली औषधि है.

ब्राहमी (Bacopa monnieri): इसके औषधीय गुणों द्वारा तनाव, अवसाद जैसे मानसिक रोग डोर हो जाते हैं तथा समरन शक्ति का विकास भी होता है. यह औषधि मस्तिष्क के तंतूयों में नवीन उर्जा उत्पन्न कर मानसिक शांति और मनोबल वृद्धि दोनो को बढ़ती है.

हल्दी (Curcuma longa): शारीरिक एवं मानसिक व्याधियों के निवारण हेतु हल्दी एक अद्भुत उपयोगी औषधि है. ख़ास तौर पर इसका प्रयोग ऋतु बदलने के समी पर होने वेल अवसाद में महत्वपूर्ण है.

गुदुची (Tinospora cordifolia): यह नवीन उर्जादायक एवं रोग प्रतिकारक क्षमता को बढ़ने वाला औषध जी समरन शक्ति, धृति शक्ति का विकास करता है. यह मंबुद्धिता का निवारण करता है

जटामंसी (Nardostachys jatamansi): इस जड़ी-बूई के सेवन से मासिक विश्रान्ति की अनुभूति मिलती है. यह मान में सकारात्मक विचार उत्पन्न कर सही दिशा में इन्हें निर्देशित करता है और अवसाद का निवारण करता है.

विषाद रोग से मुक्ति पाने के कुछ घरेलू नुस्खे

४-५ बेर के फल लेकर उनमें से बीज निकल दें तथा गुदा का पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को निचोड़ कर २ चम्मच रस निकाल लें. इसमें आधा चम्मच जयफल मिल लें. इस मिश्रण को आक्ची तरह घोल लें और दिन में दो बार इसका सेवन करें.कुछ काजू लेकर उनका पाउडर बना लें. १ चम्मच पाउडर को ई कप दूध में डालकर इसका सेवन करना चाहिए.२ बड़े चम्मच ब्राहमी और अश्वगंधा के पाउडर को १ गिलास पानी में मिलकर रोज़ इसका सेवन करें.
रोगी को हर समय किसी सकारात्मक कार्य में व्यस्त रहना चाहिए. इससे मन व्यर्थ की सोच-विचार से बचता है. व्यक्ति को अनेक प्रकार के सरल कार्य करने को दें. पर्याप्त विश्राम और ध्यान की विधियों द्वारा सकारत्मक उर्जा का निर्माण करें

ज्यादा नींद आने के कारण


मन का एकाग्रचित्त न होना ज्यादा नींद आने के कारण- यदि हमारा मन एकाग्रचित्त नहीं होगा तो हमें कभी भी अच्छी नींद नहीं आएगी जिनका मन एकाग्र नहीं होगा या तो वह कम नींद लेंगे या बहुत अधिक नींद लेंगे .

दिनचर्या असंतुलित होना ज्यादा नींद आने के कारण – जिन लोगो की दिनचर्या असंतुलित होती है उन लोगो को बहुत अधिक नींद आती है.

एक बार में पूरी नींद न ले पाना ज्यादा नींद आने के कारण- एक बार में पूरी नींद नहीं लेना एक बहुत बढ़ा कारण है अत्यधिक नींद का. जो व्यक्ति एक बार में  पूरी नींद नहीं लेते है वो बार बार सोते रहते है.

मधुमेह ज्यादा नींद का कारण –मधुमेह की समस्या भी अधिक नींद का एक कारण है मधुमेह के रोगियों को बहुत अधिक नींद आती है.

अधिक नींद के हानिकारक प्रभाव

 अधिक नींद के कारण- अधिक सोने का सीधा असर आपके मस्तिष्क पर होता है इससे हमारा मानसिक संतुलन बिगड़ता हैं हमारे सोचने समझने की शक्ति पर भी बुरा असर पड़ता है.

मोटापे का बढ़ना अधिक नींद के कारण- अधिक नींद के कारण आप ज्यादातर समय सुस्त महसूस रहते हैं तथा आपके शरीर की उर्जा वसा में तब्दील हो जाती है। जिस कारण हमारे शरीर का मोटापा बढ़ने लगता है जो हमारे शरीर के लिए बहुत ही घातक होता है.

सिरदर्द अधिक नींद के कारण-बहुत देर तक सोते रहने के कारण हमारे सर में दर्द होने लगता है ज्यादा देर तक सोते रहने के हमारी सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है.

कमरदर्द की समस्या अधिक नींद के कारण- अधिक देर तक बिस्तर में सोते रहने की वजह से हमारे शरीर मे दर्द होने लगता है। इसके कारण कई बार दर्द कमर, कंधे और गर्दन तक पहुंच जाता है। शरीर के अंगो मे थकान होने लगती है जिससे कोई भी काम करने मे परेशानी का अनुभव होता है। इसलिए आवश्यक नींद के बाद एक्सरसाइज जरूर करें.

दिल से सम्बंधित समस्या अधिक नींद के कारण- जो लोग जरूरत से ज्यादा नींद लेते है. उन्हें दिल से जुडी समस्याओं का सामना करना पड़ता है ऐसे लोगो में हार्ट अटैक का खतरा बड़ जाता है.

अधिक नींद को कम करने के घरेलू उपाय

वज्र आसन का अभ्यास करे नींद कम करने के लिए- जिन लोगो को अधिक नींद आती है उन्हें बज्र आसन करना चाहिए इसे करने से नींद कम आती है और मन इधर-उधर नहीं भटकता है.

अत्यधिक मसालेदार भोजन से परहेज करे नींद कम करने के लिए- जिन लोगों को अधिक नींद आती है उन्हें अधिक मसालेदार भोजन से परहेज करना चाहिए क्योंकि ज्यादा मसालेदार भोजन शरीर के लिए नुकसानदायक होता हैं.

रात्रि में भोजन की मात्रा कम करे नींद कम करने के लिए – रात को भोजन कम करना चाहिए. अगर रात को भोजन कम  खाएंगे तो इसे नींद भी कम आएगी कम खाना नींद कम करने का एक अच्छा उपाय है.

अधिक वसायुक्त भोजन से करने बचे नींद कम करने के लिए –जिन लोगो को अधिक नींद आती हैं, उन्हें हमेशा वसायुक्त भोजन से बचना चाहिए अधिक वसा युक्त भोजन शरीर के लिए नुकसानदायक होता है.

आँखों में काजल लगाने से नींद में कमी आती है- आँखों में काजल लगाने से नींद कम आती है इसीलिए जिन लोगो को बहुत अधिक नींद आती है उन्हें आँखों में काजल लगाना चाहिए.

जिन व्यक्तियों को अधिक नींद आती है उन लोगो को इन उपायों के द्वारा अपनी नींद को कंट्रोल मैं रखने का प्रयास करना चाहिए क्योकि बहुत अधिक नींद भी आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होती है