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Saturday, 4 March 2017

डिप्रेशन या अवसाद

डिप्रेशन या अवसाद एक ऐसी मनो स्थिति जो हर इंसान ने अपने जीवन काल में किसी ना किसी रूप में कभी ना कभी अनुभव की है. और आज के इस तेज़-तर्रार युग में यह रोग सर्दी/ज़ुकाम की तरह हो रहा है. लगभग 10 % जनसंख्या में अवसाद रोग के रूप में पाया जाता है. विपरीत परिस्थितियों में मानसिक तनाव और विषाद महसूस करना तो प्राकृतिक ही है परंतु जब यह मानसिक स्थिति अनियंत्रित एवं दीर्घकालीन बन जाए और मानसिक विकृति बनकर रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करने लगे तब इसका इलाज करना आवश्यक हो जाता है.

यह रोग सभी उम्र अथवा श्रेणियों ( working, non-working, healthy, diseased) के व्यक्ति में उत्पन्न हो सकता है. और प्रसन्नता का विषय यह है की ये सुसाध्य रोग है. प्रभावशाली उपचार तथा मनोविशलेषन द्वारा यह रोगआसानी से ठीक हो जाता है.

अवसाद के कारण

हालाँकि यह रोग अब जनसंख्या में अत्यधिक व्याप्त होता जा रहा है परंतु अभी तक इसके मुख्य कारण के बारे में स्पष्टता नही मिल पाई है. वैज्ञानिक यही मानते हैं की यह रोग मनोवैज्ञानिक, आनुवांशिक और पर्यावरण संबंधी कारणों से उत्पन्न होता है.
कुछ लोगों में जन्म से ही अवसाद का रोग पाया जाता है. उनके मस्तिष्क में प्राकृतिक रसायनों  का असंतुलन रहता है. इसके अलावा दीर्घ रूप से बीमार लोग, वीडियो गेम्स या इंटरनेट का अधिक प्रयोग करने वाले, वे लोग जिनके प्रिय जनो की मृत्यु अथवा उनसे वियोग हो गया है इत्यादि व्यवहारिक कारणों से भी ग्रस्त व्यक्ति में अवसाद का रोग उत्पन्न हो जाता है.
प्रकृति के करीब रहने से इस रोग के होने की संभावना कम हो जाती है.

डिप्रेशन के लक्षण

आत्महत्या के विचार आनाआत्मविश्वास की कमी ख़ालीपन की भावनाअपराध भाव से ग्रस्त होना सामाजिक अलगाव और चिड़चिड़ा स्वाभाव निर्णय लेने में असमर्थता बहुत अधिक अथवा बहुत कम सोना

डिप्रेशन का उपचार

इस रोग के इलाज में psychotherapy और दवाई दोनो का ही उपयोग किया जाता है. मामूली अवसाद केवल मनोविशलेषन द्वारा निवृत्त हो जाता है. परंतु गहरे अवसाद का उपचार दवाइयों से किया जाता है. अवसाद-विरोधी दवाइयाँ मस्तिष्क में रसायनिक आसनतुलन को ठीक करती हैं तथा माना जात है इस प्रकार ये अवसाद को डोर कर देती हैं. परंतु आपको जानकार हैरानी होगी की इन दवाइयों के दुष्प्रभाव से रोगी में आत्महत्या के विचार आने लगते हैं या फेर घबराहत के दौरे पद सकते हैं . अन्य भी बहुत से साइड-एफेक्ट्स इन दवाइयों से होते हैं.
परंतु यदि आप आत्मबल को मज़बूत करने की चेष्टा करें तथा आयुर्वेदीय चिकित्सा के मूलभूत सिद्धांतों को समझकर उपचार करें, तो इस रोग से मुक्ति प्राप्त कर स्वास्थ की ओर उन्मुख हुआ जा सकता है.

आयुर्वेद में इस रोग को विषाद रोग के नाम से जाना जाता है. इस अवस्था को रोग-उत्तेजक कारक भी कहा जाता है. यह मनोरोग धीरे धीरे शरीर में प्रविष्ट हो व्यक्ति की स्वस्थ, संवेदना, अनुभूति, ग्रहनशीलता, इन सबको प्रभावी करता है. जब विषाद रोग का रूप ले लेता है, तब इसका उपचार करना अत्यंत आवश्यक हो जाता है.

अवसाद से मुक्त करने वाली आयुर्वेदीय औषधियाँ

अश्वगंधा (Withania somnifera): इस औषधि के प्रभाव से मन में नकारत्मक विचार आने बंद हो जाते हैं. यह तनाव, और शारीरिक कमज़ोरी को दूर करने वाली औषधि है.

ब्राहमी (Bacopa monnieri): इसके औषधीय गुणों द्वारा तनाव, अवसाद जैसे मानसिक रोग डोर हो जाते हैं तथा समरन शक्ति का विकास भी होता है. यह औषधि मस्तिष्क के तंतूयों में नवीन उर्जा उत्पन्न कर मानसिक शांति और मनोबल वृद्धि दोनो को बढ़ती है.

हल्दी (Curcuma longa): शारीरिक एवं मानसिक व्याधियों के निवारण हेतु हल्दी एक अद्भुत उपयोगी औषधि है. ख़ास तौर पर इसका प्रयोग ऋतु बदलने के समी पर होने वेल अवसाद में महत्वपूर्ण है.

गुदुची (Tinospora cordifolia): यह नवीन उर्जादायक एवं रोग प्रतिकारक क्षमता को बढ़ने वाला औषध जी समरन शक्ति, धृति शक्ति का विकास करता है. यह मंबुद्धिता का निवारण करता है

जटामंसी (Nardostachys jatamansi): इस जड़ी-बूई के सेवन से मासिक विश्रान्ति की अनुभूति मिलती है. यह मान में सकारात्मक विचार उत्पन्न कर सही दिशा में इन्हें निर्देशित करता है और अवसाद का निवारण करता है.

विषाद रोग से मुक्ति पाने के कुछ घरेलू नुस्खे

४-५ बेर के फल लेकर उनमें से बीज निकल दें तथा गुदा का पेस्ट बना लें. इस पेस्ट को निचोड़ कर २ चम्मच रस निकाल लें. इसमें आधा चम्मच जयफल मिल लें. इस मिश्रण को आक्ची तरह घोल लें और दिन में दो बार इसका सेवन करें.कुछ काजू लेकर उनका पाउडर बना लें. १ चम्मच पाउडर को ई कप दूध में डालकर इसका सेवन करना चाहिए.२ बड़े चम्मच ब्राहमी और अश्वगंधा के पाउडर को १ गिलास पानी में मिलकर रोज़ इसका सेवन करें.
रोगी को हर समय किसी सकारात्मक कार्य में व्यस्त रहना चाहिए. इससे मन व्यर्थ की सोच-विचार से बचता है. व्यक्ति को अनेक प्रकार के सरल कार्य करने को दें. पर्याप्त विश्राम और ध्यान की विधियों द्वारा सकारत्मक उर्जा का निर्माण करें

Thursday, 26 January 2017

DEPRESSION डिप्रेशन 🌹🌹


आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर चोथा आदमी डिप्रेशन का शिकार होता जा रहा है। depression  कई बार थोड़े से समय के लिए ही रहता है, कभी यही depression एक भयानक रूप ले लेता है। कोई इंसान डिप्रेशन से  संबंधी बीमारी से पीड़ित होता है, तो कई बार यह उस इंसान के रोजमर्रा की ज़िंदगी को और उसके कामकाज में बाधा डालता है या उस इंसान  के परिवार वालो के दुखों का कारण बन जाता है।

क्या होता है DEPRESSION

Depression की स्थिति तब होती है जब हम जीवन के हर पहलू पर नकारात्मक (negative attitude ) रूप से सोचने लगते हैं। जब यह स्थिति चरम पर पहुंच जाती है तो इंसान को अपनी  ज़िंदगी बेकार लगने लगने लगती है और धीरे धीरे इंसान डिप्रेशन की स्थिति मे पहुच जाता है । चिंता और तनाव के कारण शरीर में कई हार्मोन(hormones) का level  बढ़ता जाता है,  जिनमें एड्रीनलीन (adrenaline) और कार्टिसोल (cortisol) प्रमुख हैं। लगातार तनाव(stress) और चिंता(tension) की स्थिति अवसाद यानि की depression में बदल जाती है।

मनोविज्ञानिक लक्षण – PSYCHOLOGICAL SYMPTOMS)

1 निरन्तर चिंता करना
2 स्वस्थ के विषय में चिंता करना
3 नकारात्मक विचार आना
4 भ्रामक विचार
5 काम में मन ना लगना
6 स्वभाव चिड़चिड़ा होना
7 छोटो छोटी बातो पर गुस्सा आना
8 भ्रम करना
9 मनःस्थिति में बदलाव
10 पागलो जैसा बर्ताव करना
11 अकेला रहना
12 बुरे सपने आना
13 खुश न रहना
14 स्ट्रेस लेना
15 कम बोलना
16 डर लगना



शारीरिक लक्षण – PHYSICAL SYMPTOMS

1 सर दर्द होना
2 दिल का काँपना
3 खाना निगलने में मुश्किल
4 उल्टी आने को होना
5 बार बार बाथरूम जाना
6 पीला पड़ना
7 श्वास छोटा होना
8 चक्कर आना
9 मासपेशियों में दर्द
10 दिल की धड़कन तेज होना
11 शारीर का काँपना
12 पसीना आना
13 ब्लड प्रेशर कम ज्यादा होना
14थकावट होना

 डिप्रेशन के समय इंसान को लगता है की उसकी ज़िंदगी मे कुछ भी नही बदलने वाला और वह इंसान अपनी हार मान लेता है। तो आइये जानते है की कैसे आप नकरात्मक विचारो से छुटकारा पाकर depression को कम कर सकते है।

1 मामले से ध्यान हटाये
इस योजना या रणनीति में व्यक्ति उस  स्थिति या समस्या से अपना ध्यान हटा लेता है और खुद को दूसरे काम में बिजी रखने की कोशिश करता है।  उस समस्या के बारे में सोचना भी छोड़ देता है जिससे व्यक्ति को शांति मिलती है

2 डिप्रेशन की वजह जानें

अगर आप डिप्रेशन का समाधान निकालना चाहते हैं, तो डिप्रेशन  की वजह को जानने की कोशिश करें। इसके बाद इसे कही लिख सकते लें। फिर सोचें कि इस प्रोब्लेम  का क्या solution  हो सकता है? अगर पॉसिबल हो, तो उस पर जल्द से जल्द अमल करना शुरू कर दें।

3 Future की टेंशन ना लें

‘’कल क्या होगा’’ परेशानियों को बढ़ावा देता है, इसलिए हमेशा आज में जिएं क्योकि present ही reality है और उसे बेहतर करने की कोशिश करते रहें। ऐसा करने से आपका future  अपने आप ठीक हो जाएगा। हमारा हर दिन और हर पल हमें कुछ न कुछ नई बातें सिखाता है और परेशानियों और दिक्कतों से लड़ना सिखाता है।

4 चीखना
कुछ लोग हार से पैदा हुई हताशा, तनाव आदि को दूर करने के लिए जोर जोर से चीखने लगते है।  ये तनावपूर्ण स्थिति या कष्टदायी स्थिति को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है।  मनोविज्ञानिक  भी तनावपूर्ण स्थिति में चीखने को एक अच्छी तकनीक मानते है

5 गाने सुनना
तनाव या दबाव को दूर करने के लिए एक अच्छी तकनीक या योजना है कि व्यक्ति को गाने सुनने चाहिए। इससे तनाव में कमी आती है और व्यक्ति तरोताजा हो महसूस करता है

6 भावनाओ को बाहर निकलना
रोजमर्रा की जिंदगी में व्यक्ति किसी भी समस्या से तनाव में आ सकता है ऐसे में ये तरीका या युक्ति बहुत काम आती है की व्यक्ति अपनी समस्याओ को दूसरे लोगो जैसे दोस्त, भाई, बहन, आदि के साथ बाटता या सांझा करता है
 तो  इससे उसका मन हल्का हो जाता है और तनाव कम हो जाता है क्योंकि उसके मन में पैदा हुई भावनाये निकल जाती है

7 नशीली चीज़ों का सेवन न करे
अक्सर तनाव को कम करने के लिए व्यक्ति शराब , ड्रग्स, सिगरेट आदि का सहारा लेते है जिससे कुछ टाइम के लिए तो वो उस स्थिति से दूर हो जाते है लेकिन धीरे धीरे वो एक गम्भीर लत बन जाती है जो एक नए तनाव को पैदा करती है इसलिए इंसान को इससे दूर ही रहना चाहिये



8 प्राणयाम से दूर कीजिये depression

अगर आप टेंशन और डिप्रेशन  से मुक्त होना चाहते हैं तो रोज प्राणयाम करें। इस योग से टेंशन,स्ट्रैस और डिप्रेशन कम होता है और बुद्धि तेज होती है।
9 हंसने की कला सीखें

हंसने से stress  का स्तर कम होता है और हमारी मांसपेशियों को आराम मिलता है। इससे feel good factor बढ़ता है और एन्डार्फिन हार्मोन्स की मात्रा बढ़ती है और इससे हम relax महसूस  करते है।



10 अकेलेपन से छुटकारा पाये

अकेलापन डिप्रेशन का एक सबसे बड़ा कारण है। अगर आपके परिवार मे कोई इंसान डिप्रेशन से पीड़ित है तो जितना हो सके उसके साथ समय बिताए। ज्यादा डिप्रेशन मे अक्सर लोगो मे आत्महत्या का विचार सबसे पहले आता है इसलिए जितना हो सके उस इंसान के साथ समय बिताए।