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Thursday, 9 February 2017

.शतावर ( shtawawar )के गुण

 इसका बहुत ही महत्व है ।बहुत से रोगों को दूर इसके सेवन से किया जा सकता है इसका विस्तार से वर्णन है । शतावर को संस्कृत में- शतावरी , शातमुलि ।हिंदी में - शतावर ।तमिल में - सडावरी । तेलगु में - चल्ला । लैटिन में एस्पेरेगस रेसिमोसस कहते है ।

 इसका पेड़ काँटेदार बेल की तरह होता है । इसकी शखाये चिकनी और तिकोनी होती है । इसके पत्ते आधा से एक इंच लम्बे होते है । जो की दो से छः पत्तो के गुच्छे के रुप में होते है ।इसके फूल छोटे , सुगन्धित , या गुलाबी रंग के होते है ।इसके फूल एक बार में हजारो की संख्या में आते है जिसे पूरा की पूरा पेड़ ढँक जाते है । इसके फल लाल रंग के गोल छोटे और चमकदार होते है । इसकी जड़े गुच्छे के रूप में होते है यही जड़े औषधि के रूप में काम आती है ।

 यह भारत के लगभग सभी समशीतोष्ण स्थानों में पायी जाती है । यह हिमालय एवं अरावली के पर्वत क्षेत्र में बहुतायत मात्रा में पाया जाता है ।शतावर लगभग सभी किराने के दुकानों में मिल जायेगे ।

 फल गुण - यह मधुर , कटु , चिकनी , शीतल , पौष्टिक , वीर्यवर्ध्दक , बलकारक , नवयौवन प्रदायक होता है ।इसके सेवन से बलवीर्य में बृद्धि होती है और पुरुषो में मर्दाना ताकत बढ़ जाती है । यह स्त्रियों के गर्भाशय शक्ति प्रदान करती है और माता के स्तनों में दूध बढ़ाती है । यह मस्तिष्क , नेत्र , ह्रदय , नाड़ी आदि के समस्त रोगों को दूर करके उन्हें शक्ति प्रदान करती है ।

(1 ) पेशाब में रुकावट -40 ग्राम सुखी शतावर को कूट कर पानी के साथ पीस ले और उसे कपड़े से छान कर बराबर मात्र में दूध के साथ ले । इसे शीघ्र ही खुलकर पेशाब होने लगेगा । या ताज़ी शतावर का 25 ग्राम रस गाय के दूध के साथ पिलादे इसके पिलाने के कुछ ही देर में पेशाब चालु हो जाएगा ।

( 2 ) पौरुष बल बढ़ाने के लिये -

 100 ग्राम सुखी शतावर को कूट कर महीन कपड़े से छान कर चूर्ण बनाले एवं 10 दिन सुबह नास्ते के बाद एक ग्लास दूध से ले ।इसे बल - वीर्य बढ़ जाता है ।

100 ग्राम कौंच के बिज , 100 ग्राम अश्वगन्धा , 100 ग्राम मुसली , 100 ग्राम शतावर सबको अच्छी तरह से कूट कर महीन चूर्ण बनाले और 5 - 5 ग्राम चूर्ण सुबह - शाम दूध के साथ ले ।इसे नपुंसकता , ताकत का अभाव , चिड़चिड़ापन , निराशा आदि की समस्या दूर हो जाती है ।काम इच्छा को तेज कर देती है । इसका सेवन गर्मी कदिनों में नही करनी चाहिये ।

 सूखी शतावर 10 ग्राम , मिश्री 100 ग्राम दोनों को कूट क्र महीन चूर्ण बनाले ।और इसमे से 5 ग्राम शुध्द देशी घी में मिलाकर चाट कर एक ग्लास दूध पीये ।इसे स्वप्नदोष , शीघ्रपतन आदि समाप्त हो जाती है ।इसका सेवन गर्मी के मौसम में वर्जित है ।

 ( 2 ) बांझपन - सुखी शतावर का चूर्ण 5 ग्राम 10 ग्राम घी के साथ चाट कर एक ग्लास गुनगुना दूध पी ले ।इसका एक से डेढ़ माह के सेवन से ही स्त्रियों के गर्भाशय की समस्त विकृतियां दूर हो जाती है ।जिसे गर्भ स्थापना में सहयोग मिलती है ।

 (3) स्त्रियों के दूध बढ़ाने के लिये -200 ग्राम शतावर को कूट कर चूर्ण बनाले ।और इसे प्रतिदिन 5 ग्राम दूध के साथ सुबह शाम दे ।इसे माता के स्तनों का दूध बढ़ जाता है ।प्रसव में आई कमजोरी भी दूर हो जाती है ।