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Sunday, 19 March 2017

पान जरूर खायें

पान को हजारों वर्षों से चबाया जा रहा है। पान के पत्ते का व्यवहार दो हज़ार साल पहले से हुआ है । पान का पत्ता और सुपारी परम्परागत रूप से हिन्दुओं के किसी भी अनुष्ठान में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। पान का पत्ता डंठल के साथ इस्तेमाल होता है सिर्फ स्टफ करने के बाद खाने के वक्त छोटा-सा डंठल रखा जाता है। इसका यही कारण है कि कभी-कभी एक प्रकार का छोटा साँप (केंचुआ या अर्थवर्म की तरह) डंठल में पाया जाता है। दक्षिण भारत में पान और सुपारी, हल्दी और कुमकुम विवाहित महिलाओं को दिये जाते हैं खास नवरात्री के दौरान ‘वरलक्ष्मीपूजा’ के समय या किसी मांगलिक कार्य के अवसर पर जैसे - शादी या त्योहार। राजस्थानी विवाह के समय वर और बाराती तभी खाते है जब रुपया दिया जाता है और वधु पक्ष के बड़े मेहमानों को पान खिलाते है।

औषधी के रूप में पान के पत्तों का क्या इस्तेमाल हो सकता है, यह सोचना है। दिल के आकार वाला पत्ता का पौधा 10-15 फीट ऊँचा तीन महीनें में ही हो जाता है। जब पौधा एक मीटर का हो जाता है तब पत्तों को दाहिने अंगूठे से पकड़कर तोड़ा जाता है। नसों को नीचे करके रखना चाहिए और यह साल में एक बार पत्तों का आकार धीरे-धीरे छोटा होने लगता है। पान का पौधा बहुत नाज़ुक होता है। यह दक्षिण और दक्षिणपूर्वी एशिया में हमारे देश, श्रीलंका, वियतनाम और मलेशिया में होता है। पान में अच्छे क्वालिटी के पान को मघई कहते हैं जो बिहार के पटना, मगध प्रांत में होता है।

मुम्बई में यह मघई पान आपको हाजी अली में मिलेगा।

इसका उल्लेख श्रीलंका की इतिहास की पुस्तक महाभस्म में मिलता है जो पाली में लिखा है।

पान को भारतीय संस्कृति में हिंदुओं के लिए हर तरह से शुभ माना जाता है। धर्म, संस्कार, आध्यात्मिक एवं तांत्रिक क्रियाओं में भी पान का इस्तेमाल सदियों से किया जाता रहा है। इसके अलावा पान का रोगों को दूर भगाने में भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।

खाना खाने के बाद और मुंह का जायका बनाए रखने के लिए पान बहुत ही कारगर है। कई बीमारियों के उपचार में पान का इस्तेमाल लाभप्रद माना जाता है।

पायरिया :- पान में देशी कपूर को लेकर दिन में तीन-चार बार चबाने से पायरिया की शिकायत दूर हो जाती है।

चोट लगने पर :- चोट लगने पर पान को गर्म करके परत-परत करके चोट वाली जगह पर बांध लेना चाहिए। इससे कुछ ही घंटों में दर्द दूर हो जाता है।

खांसी में :- खांसी आती हो तो गर्म हल्दी को पान में लपेटकर चबाएं।  यदि खांसी रात में बढ़ जाती हो तो हल्दी की जगह इसमें अजवाइन डालकर चबाना चाहिए।

सरसों के तेल में भीगे और गर्म किये हुए पान के पत्ते लगाने से खांसी और सांस लेने में कठिनाई से मदद  मिलती है। शहद के साथ मिले हुए कुचले पान के फल या बेर से खांसी की परेशानी से राहत मिलती है।

किडनी में :-  यदि किडनी खराब हो तो पान का इस्तेमाल बगैर कुछ मिलाए करना चाहिए। इस दौरान मसाले, मिर्च से पूरा परहेज रखना जरूरी है।

जलने व छालों पर :- जलने या छाले पड़ने पर पान के रस को गर्म करके लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं। पीलिया, ज्वर और कब्ज में भी पान का इस्तेमाल बहुत फायदेमंद होता है।

जुकाम :-  जुकाम होने पर पान में लौंग डालकर खाने से जुकाम जल्दी पक जाता है।

श्वासनली की वीमारी में :- श्वास नली की बीमारियों में भी पान का इस्तेमाल अत्यंत कारगर है। इसमें पान का तेल गर्म करके सीने पर लगातार एक हफ्ते तक लगाना चाहिए।

मन पर अच्छा प्रभाव :-  पान में पकी सुपारी व मुलेठी डालकर खाने से मन पर अच्छा असर पड़ता है।

बनारसी पान - भूख बढ़ाने, प्यास बुझाने और मसूड़ों की समस्या से निजात पाने में बनारसी एवं देशी पान फायदेमंद साबित होता है।

गठिया का सूजन :- पान की पत्तियों को स्थानीय तौर पर लगाने से गठिया और  सूजन का इलाज किया जाता है। पत्तियों के गर्म प्रलेप के मिश्रण या उनके रस के साथ कोई भी तेल जैसे  नारियल का तेल को कमर पर लगाना अनुकूल परिणाम देता है।

मधुमेह में :- पान में मधुमेह रोधी गुण होते हैं और यह इसके उपचार में मदद करता है।

सिर दर्द :- तंत्रिका दर्द, तंत्रिका की थकावट और दुर्बलता के उपचार के लिए शहद के एक चम्मच के साथ कुछ पान के पत्ते का रस एक टॉनिक बनाता है। पान के पत्ते की एनाल्जेसिक और ठंडी विशेषताओं की वजह से ऊपर से लगाने में यह तेज सिर दर्द से राहत दिलाने में मदद करेगा

चोट में :-  पान के कुछ पत्तों का रस चोट पर लगाएं और पान का पत्ता रख कर पट्टी बांध दें, तो चोट 2-3 दिन में ठीक हो जाती है।

- पान पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है, साथ ही वज़न को भी नियंत्रित करने में भी मदद करता है। जब पान को काली मिर्च के साथ खाया जाता है तब वज़न घटाने के प्रक्रिया और भी असरदार में काम करने लगती है।

पान को चबाने से चयापचय (Metabolism) का दर बढ़ जाता है, मुँह में लार बनने लगता है जो खाने को जल्दी हजम करवाने में मदद करता है। साथ ही शरीर से विषाक्त पदार्थों को निकालने में सहायता करता है। इसमें फाइबर उच्च मात्रा में होने के कारण भूख कम लगती है और कब्ज़ की बीमारी से भी राहत मिलती है। पान के पत्ते को जब काली मिर्च के साथ खाया जाता है तब इसमें जो फाइटोन्यूट्रीएन्ट (Phytonutrients) और पीपरीन ( Piperine) होता है वह शरीर में फैट को जमने नहीं देता है। और शरीर से विषाक्त पदार्थों को और अतिरिक्त जल को बाहर निकालने में मदद करता है।

विधि- एक ताजा पान के पत्ते में तीन-चार काली मिर्च का दाना रखकर अच्छी तरह से मोड़ लें। फिर उसको धीरे-धीरे चबाकर खायें। इससे उसकी पूरी पौष्टिकता लार के साथ पेट में चली जाएगी । रोज सुबह खाली पेट इसको आठ हफ़्ते तक खायें और अपने वज़न में आए अंतर को देखें।

चूना का एक महत्वपूर्ण कार्य है :- यह जीभ से जल्दी ही सोख कर रक्त कोशिकाओं में फैल जाता है। यह एन्टिसेप्टिक है, डाइजेस्टिव ऐड है और सासों को तरोताज़ा रखता है।

आयुर्वेद में पान को एफरोडिसियेक मानते हैं। ऐसे तो पान का पत्ता खाने में कड़वा होता है मगर स्टफ करने के बाद जो पान खाते हैं उन्हें वह स्वाद बहुत भाता है। पान त्रिदोष (वात-पित्त-कफ ) तीनो का शमन करता है ।

ज़्यादा समय तक पान खाने से माउथ अल्सर और मसूड़ों की सड़न से सभी दाँत को खोने की संभावना बढ़ जाती है। रात को खाने के बाद माउथ फ्रेशनर के रुप में पान खाया जाता है। यह खाना हज़म करने में सहायता करता है लेकिन ख्याल रहे कि सोने के पहले दाँतों को अच्छी तरह साफ कर लें।

सावधानी- हमेशा ताजा पान का पत्ता खाना स्वास्थ्य के दृष्टि से हितकारी होता है क्योंकि बासी या काला पत्ता औषधीय गुण से रहित होता है। बासी पत्ते को खाने से पेट में गड़बड़ी होने की आशंका भी हो सकती है। पान में कभी भी सोपारी , कत्था , तम्बाकू डालकर ना खायें ।