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Tuesday, 20 March 2018

Common cold, flu

जीवनशैली और आदतें कैसी भी हों कामन कोल्ड बहुत ही आम होने के कारण किसी भी मौसम में हो सकता है। कामन कोल्ड से निज़ात पाने का कोई शार्ट कट नहीं है, चाहै आप कितनी भी दवाइयां या वैक्सीन लें। 
 कामन कोल्ड का संक्रमण थोड़ा भयभीत करने वाला  हो सकता है और इसके लक्षण जैसे खांसी, बुखार , सर्दी, नजला,  आपको दवाएं लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
 यह ध्यान देने योग्य बात है कि अगर आप कोई दवा या वैक्सीन नहीं ले रहै हैं तो आपको कामन कोल्ड के संक्रमण से बचना चाहिए। 

कामनकोल्ड से रोकथाम-
 हम सभी जानते हैं कि कामन कोल्ड संक्रमण या एक दुसरे के माध्यम से फैलने वाली बीमारी है, और इसलिए इससे बचने के लिए हाथ धोना बहुत ज़रूरी है।  
हम प्रतिदिन कई सार्वजानिक स्थानों पर आते जाते रहते हें, अलग अलग पब्लिक वाहनों में सफ़र करते हैं| सभी जगह हाथ का स्पर्श होता है, इससे कामन कोल्ड से संक्रमित व्यक्ति के हाथों में अकसर वायरस चिपक जाते हैं, जो फिर टेलिफोन, डेस्क, सेलफोन या डोरबेल आदि  पर भी चिपक जाते हैं, इससे वाईरस को आने जाने का मोका मिल ही जाता है| इन्ही हाथो से हम सब न केवल अपने नाक मुहं को स्पर्श करते हें वरन छोटे बच्चो को भी उठा लेते हैं, और अनजाने में ही वाईरस को छोटे बच्चों को भी प्रदान कर देते हें।
ये कीटाणु स्वचालित तरीके से किसी दूसरे व्यक्ति में फैलते रहते हैं|  इसीलिए हमेशा घर में प्रवेश के तुरंत बाद, और हर जगह  समय समय पर बार बार अच्छी तरह से हाथ धोना इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है| अन्यथा हम अपनी और अपनों की बीमारी का कारण बन जाते हें|
यह भी याद रखें की केवल पानी से हाथ गीला करना हाथ धोना नहीं, अच्छी तरह साबुन आदि का प्रयोग भी होना ही चाहिए|
पर्याप्त मात्रा में पेय लें-
कामन कोल्ड जैसी परेशानी के समय गर्म पानी पीना भी थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की कोशिश करें। पानी से हमारा शरीर साफ हो जाता है और इससे मूत्र अधिक अत है और इसके साथ शरीर में मौजूद टाक्सिन या विषाणु भी निकल जाते हैं| रिहाइड्रेशन (जल की आपूर्ति)  की क्रिया भी होती रहती  है| पानी से मेटाबोलीक क्रिया नोर्मल रहने से रोग से लड़ने की शक्ति मिलती रहती है| चाय, काफी और सूप जैसे गरम आहार भी  इसका अच्छा विकल्प होता है |
साफ और ताज़ा वायु लेना ज़रूरी है:-
कामन कोल्ड से ग्रसित व्यक्ति के लिए घर की चारदीवारी के अंदर रहना समझदारी की बात तो है। लेकिन हम सब लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरीके से कमरे के अंदर का नम माहौल कीटाणु के लिए स्टोरहाउस जैसा काम करता है।  व्यक्ति को प्रतिदिन ताज़ी हवा, ताजा प्रकाश, धूप (सन बाथ) विशेष कर सर्दी के इस मोसम में, भी  लेना ज़रूरी होता है। इससे विषाणुओं का नष्ट करना आसान हो जाता है|
अपने अलग निजी तौलिया का इस्तेमाल करें:-
हाथों को साफ करने के लिए किचन और बाथरूम में पेपर की तौलिया का इस्तेमाल करना अच्छा है, या प्रत्येक सदस्य के अपने प्रतिदिन साफ किये जाने वाले निजी रुमाल, तोलिये ही प्रयोग में लाये जाये| घर में प्रत्येक सदस्य की अलग अलग तौलिया होने से कीटाणु फैल नहीं सकते |
कुछ भाई जुकाम में अल्कोहल (शराब-ब्रांडी) आदि लेने की सलाह देते हें| इन सबके बार-बार और अधिक पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली का ह्रास हो जाता है| अल्कोहल शरीर में शुष्की पैदा करता है और इससे कीटाणु को बढ़ने में आसानी होती है|
अपने चेहरे को बार बार ना छूएं -
कुछ व्यक्तियों की आदत होती है की वे अपने मुहं नाक आदि को जाने अनजाने बार-बार छूते रहते हें, नाक और मुंह को बार बार ना छूएं, क्‍योंकि ऐसे में अगर आपके आसपास किसी को कोल्ड हुआ हो तो आपको भी कोल्ड होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
क्या खाना चाहिए?  
फाइटोकेमिकल्स फ्लू और कोल्ड से लड़ने में प्रभावी होते हें, इसके लिए व्यक्ति को अच्छे संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त मात्रा में कच्चे फल और सब्ज़ियां भी खानी चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छे होते हैं। इसमें गहरे हरे, पीले और लाल रंग की सब्ज़ियां आती हैं जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को अधिक सक्षम बनाते हें| फ़ास्ट फ़ूड चाट कचोरी आदि पोषण में कमी कर रोग को बढ़ने का करण बनतीं हैं|
दोनों समय ब्रश करना,और गला साफ करना विषाणु को गले के टोंसिल्स पर और दातो के बीच फसे अन्न कणों में बढने का मोका नहीं देता, और रोग हो ही नहीं पाता| प्रतिदिन मोसम अनुसार ठंडे या गरम पानी से स्नान भी आवश्यक है| अक्सर कई लोग जुकाम होने पर नहीं नहाते, इससे विषाणु और बढ़ते जाते हें| याद रखें की सारे शरीर की सफाई, रोज धुले कपडे पहनना अति आवश्यक है|   
तुलसी, अदरक,केशर, असगंध, आदि भी यही कार्य करती हें| इन्हें चाय के स्था या अलग से काढ़े के रूप में पीना लाभदायक होता है|
नाक में षडविन्दु तैल, और सामान्य कान में हिन्ग्वादी तैल रोज डालने से जुकाम ठीक होता है|

जुकाम सर्दी होने पर अक्सर पैट ख़राब रहता है, शोच ठीक से नहीं होती, अतः यदि पार्टी सप्ताह अरंड तैल, पंचसकार चूर्ण, आदि का जुलाब ले लिया जाये जुकाम जल्दी ठीक होता है| आप अपने कोष्ठ के अनुसार चिकित्सक की सलाह से जुलाब ओषधि ले सकते हें| जुलाब नहीं लेना हो तो त्रिफला चूर्ण, हरड चूर्ण आदि रोज भी ले सकते हें|         जीवनशैली और आदतें कैसी भी हों कामन कोल्ड बहुत ही आम होने के कारण किसी भी मौसम में हो सकता है। कामन कोल्ड से निज़ात पाने का कोई शार्ट कट नहीं है, चाहै आप कितनी भी दवाइयां या वैक्सीन लें। 
 कामन कोल्ड का संक्रमण थोड़ा भयभीत करने वाला  हो सकता है और इसके लक्षण जैसे खांसी, बुखार , सर्दी, नजला,  आपको दवाएं लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
 यह ध्यान देने योग्य बात है कि अगर आप कोई दवा या वैक्सीन नहीं ले रहै हैं तो आपको कामन कोल्ड के संक्रमण से बचना चाहिए। 
कामनकोल्ड से रोकथाम-
 हम सभी जानते हैं कि कामन कोल्ड संक्रमण या एक दुसरे के माध्यम से फैलने वाली बीमारी है, और इसलिए इससे बचने के लिए हाथ धोना बहुत ज़रूरी है।  
हम प्रतिदिन कई सार्वजानिक स्थानों पर आते जाते रहते हें, अलग अलग पब्लिक वाहनों में सफ़र करते हैं| सभी जगह हाथ का स्पर्श होता है, इससे कामन कोल्ड से संक्रमित व्यक्ति के हाथों में अकसर वायरस चिपक जाते हैं, जो फिर टेलिफोन, डेस्क, सेलफोन या डोरबेल आदि  पर भी चिपक जाते हैं, इससे वाईरस को आने जाने का मोका मिल ही जाता है| इन्ही हाथो से हम सब न केवल अपने नाक मुहं को स्पर्श करते हें वरन छोटे बच्चो को भी उठा लेते हैं, और अनजाने में ही वाईरस को छोटे बच्चों को भी प्रदान कर देते हें।
ये कीटाणु स्वचालित तरीके से किसी दूसरे व्यक्ति में फैलते रहते हैं|  इसीलिए हमेशा घर में प्रवेश के तुरंत बाद, और हर जगह  समय समय पर बार बार अच्छी तरह से हाथ धोना इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है| अन्यथा हम अपनी और अपनों की बीमारी का कारण बन जाते हें|
यह भी याद रखें की केवल पानी से हाथ गीला करना हाथ धोना नहीं, अच्छी तरह साबुन आदि का प्रयोग भी होना ही चाहिए|
पर्याप्त मात्रा में पेय लें-
कामन कोल्ड जैसी परेशानी के समय गर्म पानी पीना भी थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की कोशिश करें। पानी से हमारा शरीर साफ हो जाता है और इससे मूत्र अधिक अत है और इसके साथ शरीर में मौजूद टाक्सिन या विषाणु भी निकल जाते हैं| रिहाइड्रेशन (जल की आपूर्ति)  की क्रिया भी होती रहती  है| पानी से मेटाबोलीक क्रिया नोर्मल रहने से रोग से लड़ने की शक्ति मिलती रहती है| चाय, काफी और सूप जैसे गरम आहार भी  इसका अच्छा विकल्प होता है |
साफ और ताज़ा वायु लेना ज़रूरी है:-
कामन कोल्ड से ग्रसित व्यक्ति के लिए घर की चारदीवारी के अंदर रहना समझदारी की बात तो है। लेकिन हम सब लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरीके से कमरे के अंदर का नम माहौल कीटाणु के लिए स्टोरहाउस जैसा काम करता है।  व्यक्ति को प्रतिदिन ताज़ी हवा, ताजा प्रकाश, धूप (सन बाथ) विशेष कर सर्दी के इस मोसम में, भी  लेना ज़रूरी होता है। इससे विषाणुओं का नष्ट करना आसान हो जाता है|
अपने अलग निजी तौलिया का इस्तेमाल करें:-
हाथों को साफ करने के लिए किचन और बाथरूम में पेपर की तौलिया का इस्तेमाल करना अच्छा है, या प्रत्येक सदस्य के अपने प्रतिदिन साफ किये जाने वाले निजी रुमाल, तोलिये ही प्रयोग में लाये जाये| घर में प्रत्येक सदस्य की अलग अलग तौलिया होने से कीटाणु फैल नहीं सकते |
कुछ भाई जुकाम में अल्कोहल (शराब-ब्रांडी) आदि लेने की सलाह देते हें| इन सबके बार-बार और अधिक पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली का ह्रास हो जाता है| अल्कोहल शरीर में शुष्की पैदा करता है और इससे कीटाणु को बढ़ने में आसानी होती है|
अपने चेहरे को बार बार ना छूएं -
कुछ व्यक्तियों की आदत होती है की वे अपने मुहं नाक आदि को जाने अनजाने बार-बार छूते रहते हें, नाक और मुंह को बार बार ना छूएं, क्‍योंकि ऐसे में अगर आपके आसपास किसी को कोल्ड हुआ हो तो आपको भी कोल्ड होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
क्या खाना चाहिए?  
फाइटोकेमिकल्स फ्लू और कोल्ड से लड़ने में प्रभावी होते हें, इसके लिए व्यक्ति को अच्छे संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त मात्रा में कच्चे फल और सब्ज़ियां भी खानी चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छे होते हैं। इसमें गहरे हरे, पीले और लाल रंग की सब्ज़ियां आती हैं जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को अधिक सक्षम बनाते हें| फ़ास्ट फ़ूड चाट कचोरी आदि पोषण में कमी कर रोग को बढ़ने का करण बनतीं हैं|
दोनों समय ब्रश करना,और गला साफ करना विषाणु को गले के टोंसिल्स पर और दातो के बीच फसे अन्न कणों में बढने का मोका नहीं देता, और रोग हो ही नहीं पाता| प्रतिदिन मोसम अनुसार ठंडे या गरम पानी से स्नान भी आवश्यक है| अक्सर कई लोग जुकाम होने पर नहीं नहाते, इससे विषाणु और बढ़ते जाते हें| याद रखें की सारे शरीर की सफाई, रोज धुले कपडे पहनना अति आवश्यक है|   
तुलसी, अदरक,केशर, असगंध, आदि भी यही कार्य करती हें| इन्हें चाय के स्था या अलग से काढ़े के रूप में पीना लाभदायक होता है|
नाक में षडविन्दु तैल, और सामान्य कान में हिन्ग्वादी तैल रोज डालने से जुकाम ठीक होता है|
जुकाम सर्दी होने पर अक्सर पैट ख़राब रहता है, शोच ठीक से नहीं होती, अतः यदि पार्टी सप्ताह अरंड तैल, पंचसकार चूर्ण, आदि का जुलाब ले लिया जाये जुकाम जल्दी ठीक होता है| आप अपने कोष्ठ के अनुसार चिकित्सक की सलाह से जुलाब ओषधि ले सकते हें| जुलाब नहीं लेना हो तो त्रिफला चूर्ण, हरड चूर्ण आदि रोज भी ले सकते हें|  

Thursday, 23 March 2017

सर्दी-जुकाम और कफ होने की स्थ‍िति में भाप

सर्दी-जुकाम और कफ होने की स्थ‍िति में भाप लेना रामबाण उपाय है। भाप लेने से न केवल आपकी सर्दी ठीक होगी बल्कि गले में जमा हुआ कफ भी आसानी से निकल सकेगा और आपको किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।त्वचा की गंदगी को हटाकर अंदर तक त्वचा की सफाई करने और त्वचा को प्राकृतिक चमक प्रदान करने के लिए भाप लेना एक बेहतरीन तरीका है। बगैर किसी मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल किए यह तरीका आपकी स्किन को ग्लोइंग बना सकता है।चेहरे की मृत त्वचा को हटाने एवं झुर्रियों को कम करने के लिए भी भाप लेना एक बढ़िया उपाय है। यह आपकी त्वचा को ताजगी देता है, जिससे आप तरोताजा नजर आते हैं। त्वचा की नमी भी बरकरार रहती है।अगर चेहरे पर मुंहासे हैं, तो बिना देर किए चेहरे को भाप दीजिए। इससे रोमछिद्रों में जमी गंदगी और सीबम आसानी से निकल पाएगा और आपकी त्वचा साफ हो पाएगी।

।। जय श्री हरि ।।

Tuesday, 17 January 2017

खांसी, सिरदर्द, जुकाम

खांसी, सिरदर्द, जुकाम जैसी कुछ बीमारियां होती हैं जो किसी को भी किसी भी समय हो सकती है। खांसी की समस्या होने पर आप सुकून से कोई काम नहीं कर सकते हैं। खांसी बदलता मौसम, ठंडा-गर्म खाना पीना या फिर धूल या किसी अन्य चीज से एलर्जी के कारण सकती है । खांसी होने पर तकलीफ भी ज्यादा होती है। आइए हम आपको खांसी से बचने के कुछ आसान से उपायों के बारे में बताते हैं।

*सौंठ को पीस कर पानी में खूब देर तक उबालें। जब एक चौथाई रह जाए तो इसका सेवन गुनगुना होने पर दिन में तीन चार बार करें। तुरंत फायदा होगा।

*गुनगुने पानी से गरारे करने से गले को भी आराम मिलता है और खांसी भी कम होती है।

*तुलसी पत्ते, 5 काली मिर्च, 5 नग काला मनुक्का, 6 ग्राम गेहूँ के आटे का चोकर , 6 ग्राम मुलहठी, 3 ग्राम बनफशा के फूल लेकर 200 ग्राम पानी में उबालें। 1 /2 रहने पर ठंडा कर छान लें। फिर गर्म करके बताशे डालकर रात सोते समय गरम-गरम पी जाएँ और चादर ओढ़कर सो जाएँ तथा हवा से बचें। कैसी भी खुश्क खाँसी हो, ठीक हो जाएगी।

*काली मिर्च, हरड़े का चूर्ण, तथा पिप्पली का काढ़ा बना कर दिन में दो बार लेने से खाँसी जल्दी दूर होती है।

*1 चम्मच शहद में पिसी हुई कालीमिर्च मिलाकर पीने से भी खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है|

*1 चम्मच अदरक का रस में एक चोथाई शहद एवं चुटकी भर हल्दी मिलाकर लेने से खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है।

*मूली का रस और दूध को बराबर मिलाकर 1 -1 चम्मच दिन में छह बार लेने से भी शीघ्र लाभ मिलता है ।

*हींग, काली मिर्च और नागरमोथा को पीसकर गुड़ के साथ मिलाकर गोलियाँ बना लें। प्रतिदिन भोजन के बाद दो गोलियों का सेवन करने से खाँसी और कफ में लाभ मिलता है ।

1 चम्मच अजवाइन एवं हल्दी मिलाकर गरम कर ले,फिर उसे ठंडा होने के बाद शहद मिलाकर पीने से खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है।
खांसी होने पर सेंधा नमक की डली को आग पर अच्छे से गरम कर लीजिए। जब नमक की डली गर्म होकर लाल हो |

Monday, 16 January 2017

Common cold, flu (कामन कोल्ड, सर्दी, जुकाम ,फ्लू )

जीवनशैली और आदतें कैसी भी हों कामन कोल्ड बहुत ही आम होने के कारण किसी भी मौसम में हो सकता है। कामन कोल्ड से निज़ात पाने का कोई शार्ट कट नहीं है, चाहै आप कितनी भी दवाइयां या वैक्सीन लें। 
 कामन कोल्ड का संक्रमण थोड़ा भयभीत करने वाला  हो सकता है और इसके लक्षण जैसे खांसी, बुखार , सर्दी, नजला,  आपको दवाएं लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
 यह ध्यान देने योग्य बात है कि अगर आप कोई दवा या वैक्सीन नहीं ले रहै हैं तो आपको कामन कोल्ड के संक्रमण से बचना चाहिए। 

कामनकोल्ड से रोकथाम-
 हम सभी जानते हैं कि कामन कोल्ड संक्रमण या एक दुसरे के माध्यम से फैलने वाली बीमारी है, और इसलिए इससे बचने के लिए हाथ धोना बहुत ज़रूरी है।  
हम प्रतिदिन कई सार्वजानिक स्थानों पर आते जाते रहते हें, अलग अलग पब्लिक वाहनों में सफ़र करते हैं| सभी जगह हाथ का स्पर्श होता है, इससे कामन कोल्ड से संक्रमित व्यक्ति के हाथों में अकसर वायरस चिपक जाते हैं, जो फिर टेलिफोन, डेस्क, सेलफोन या डोरबेल आदि  पर भी चिपक जाते हैं, इससे वाईरस को आने जाने का मोका मिल ही जाता है| इन्ही हाथो से हम सब न केवल अपने नाक मुहं को स्पर्श करते हें वरन छोटे बच्चो को भी उठा लेते हैं, और अनजाने में ही वाईरस को छोटे बच्चों को भी प्रदान कर देते हें।
ये कीटाणु स्वचालित तरीके से किसी दूसरे व्यक्ति में फैलते रहते हैंइसीलिए हमेशा घर में प्रवेश के तुरंत बाद, और हर जगह  समय समय पर बार बार अच्छी तरह से हाथ धोना इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है| अन्यथा हम अपनी और अपनों की बीमारी का कारण बन जाते हें|
यह भी याद रखें की केवल पानी से हाथ गीला करना हाथ धोना नहीं, अच्छी तरह साबुन आदि का प्रयोग भी होना ही चाहिए|
पर्याप्त मात्रा में पेय लें-
कामन कोल्ड जैसी परेशानी के समय गर्म पानी पीना भी थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की कोशिश करें। पानी से हमारा शरीर साफ हो जाता है और इससे मूत्र अधिक अत है और इसके साथ शरीर में मौजूद टाक्सिन या विषाणु भी निकल जाते हैं| रिहाइड्रेशन (जल की आपूर्ति)  की क्रिया भी होती रहती  है| पानी से मेटाबोलीक क्रिया नोर्मल रहने से रोग से लड़ने की शक्ति मिलती रहती है| चाय, काफी और सूप जैसे गरम आहार भी  इसका अच्छा विकल्प होता है |
साफ और ताज़ा वायु लेना ज़रूरी है:-
कामन कोल्ड से ग्रसित व्यक्ति के लिए घर की चारदीवारी के अंदर रहना समझदारी की बात तो है। लेकिन हम सब लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरीके से कमरे के अंदर का नम माहौल कीटाणु के लिए स्टोरहाउस जैसा काम करता है।  व्यक्ति को प्रतिदिन ताज़ी हवा, ताजा प्रकाश, धूप (सन बाथ) विशेष कर सर्दी के इस मोसम में, भी  लेना ज़रूरी होता है। इससे विषाणुओं का नष्ट करना आसान हो जाता है|
अपने अलग निजी तौलिया का इस्तेमाल करें:-
हाथों को साफ करने के लिए किचन और बाथरूम में पेपर की तौलिया का इस्तेमाल करना अच्छा है, या प्रत्येक सदस्य के अपने प्रतिदिन साफ किये जाने वाले निजी रुमाल, तोलिये ही प्रयोग में लाये जाये| घर में प्रत्येक सदस्य की अलग अलग तौलिया होने से कीटाणु फैल नहीं सकते |
कुछ भाई जुकाम में अल्कोहल (शराब-ब्रांडी) आदि लेने की सलाह देते हें| इन सबके बार-बार और अधिक पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली का ह्रास हो जाता है| अल्कोहल शरीर में शुष्की पैदा करता है और इससे कीटाणु को बढ़ने में आसानी होती है|
अपने चेहरे को बार बार ना छूएं -
कुछ व्यक्तियों की आदत होती है की वे अपने मुहं नाक आदि को जाने अनजाने बार-बार छूते रहते हें, नाक और मुंह को बार बार ना छूएं, क्‍योंकि ऐसे में अगर आपके आसपास किसी को कोल्ड हुआ हो तो आपको भी कोल्ड होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
क्या खाना चाहिए?  
फाइटोकेमिकल्स फ्लू और कोल्ड से लड़ने में प्रभावी होते हें, इसके लिए व्यक्ति को अच्छे संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त मात्रा में कच्चे फल और सब्ज़ियां भी खानी चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छे होते हैं। इसमें गहरे हरे, पीले और लाल रंग की सब्ज़ियां आती हैं जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को अधिक सक्षम बनाते हें| फ़ास्ट फ़ूड चाट कचोरी आदि पोषण में कमी कर रोग को बढ़ने का करण बनतीं हैं|
दोनों समय ब्रश करना,और गला साफ करना विषाणु को गले के टोंसिल्स पर और दातो के बीच फसे अन्न कणों में बढने का मोका नहीं देता, और रोग हो ही नहीं पाताप्रतिदिन मोसम अनुसार ठंडे या गरम पानी से स्नान भी आवश्यक है| अक्सर कई लोग जुकाम होने पर नहीं नहाते, इससे विषाणु और बढ़ते जाते हें| याद रखें की सारे शरीर की सफाई, रोज धुले कपडे पहनना अति आवश्यक है|   
तुलसी, अदरक,केशर, असगंध, आदि भी यही कार्य करती हें| इन्हें चाय के स्था या अलग से काढ़े के रूप में पीना लाभदायक होता है|
नाक में षडविन्दु तैल, और सामान्य कान में हिन्ग्वादी तैल रोज डालने से जुकाम ठीक होता है|

जुकाम सर्दी होने पर अक्सर पैट ख़राब रहता है, शोच ठीक से नहीं होती, अतः यदि पार्टी सप्ताह अरंड तैल, पंचसकार चूर्ण, आदि का जुलाब ले लिया जाये जुकाम जल्दी ठीक होता है| आप अपने कोष्ठ के अनुसार चिकित्सक की सलाह से जुलाब ओषधि ले सकते हें| जुलाब नहीं लेना हो तो त्रिफला चूर्ण, हरड चूर्ण आदि रोज भी ले सकते हें|         जीवनशैली और आदतें कैसी भी हों कामन कोल्ड बहुत ही आम होने के कारण किसी भी मौसम में हो सकता है। कामन कोल्ड से निज़ात पाने का कोई शार्ट कट नहीं है, चाहै आप कितनी भी दवाइयां या वैक्सीन लें। 
 कामन कोल्ड का संक्रमण थोड़ा भयभीत करने वाला  हो सकता है और इसके लक्षण जैसे खांसी, बुखार , सर्दी, नजला,  आपको दवाएं लेने के लिए प्रेरित करते हैं।
 यह ध्यान देने योग्य बात है कि अगर आप कोई दवा या वैक्सीन नहीं ले रहै हैं तो आपको कामन कोल्ड के संक्रमण से बचना चाहिए। 
कामनकोल्ड से रोकथाम-
 हम सभी जानते हैं कि कामन कोल्ड संक्रमण या एक दुसरे के माध्यम से फैलने वाली बीमारी है, और इसलिए इससे बचने के लिए हाथ धोना बहुत ज़रूरी है।  
हम प्रतिदिन कई सार्वजानिक स्थानों पर आते जाते रहते हें, अलग अलग पब्लिक वाहनों में सफ़र करते हैं| सभी जगह हाथ का स्पर्श होता है, इससे कामन कोल्ड से संक्रमित व्यक्ति के हाथों में अकसर वायरस चिपक जाते हैं, जो फिर टेलिफोन, डेस्क, सेलफोन या डोरबेल आदि  पर भी चिपक जाते हैं, इससे वाईरस को आने जाने का मोका मिल ही जाता है| इन्ही हाथो से हम सब न केवल अपने नाक मुहं को स्पर्श करते हें वरन छोटे बच्चो को भी उठा लेते हैं, और अनजाने में ही वाईरस को छोटे बच्चों को भी प्रदान कर देते हें।
ये कीटाणु स्वचालित तरीके से किसी दूसरे व्यक्ति में फैलते रहते हैंइसीलिए हमेशा घर में प्रवेश के तुरंत बाद, और हर जगह  समय समय पर बार बार अच्छी तरह से हाथ धोना इसलिए भी ज़रूरी हो जाता है| अन्यथा हम अपनी और अपनों की बीमारी का कारण बन जाते हें|
यह भी याद रखें की केवल पानी से हाथ गीला करना हाथ धोना नहीं, अच्छी तरह साबुन आदि का प्रयोग भी होना ही चाहिए|
पर्याप्त मात्रा में पेय लें-
कामन कोल्ड जैसी परेशानी के समय गर्म पानी पीना भी थोड़ा मुश्किल होता है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की कोशिश करें। पानी से हमारा शरीर साफ हो जाता है और इससे मूत्र अधिक अत है और इसके साथ शरीर में मौजूद टाक्सिन या विषाणु भी निकल जाते हैं| रिहाइड्रेशन (जल की आपूर्ति)  की क्रिया भी होती रहती  है| पानी से मेटाबोलीक क्रिया नोर्मल रहने से रोग से लड़ने की शक्ति मिलती रहती है| चाय, काफी और सूप जैसे गरम आहार भी  इसका अच्छा विकल्प होता है |
साफ और ताज़ा वायु लेना ज़रूरी है:-
कामन कोल्ड से ग्रसित व्यक्ति के लिए घर की चारदीवारी के अंदर रहना समझदारी की बात तो है। लेकिन हम सब लोग यह भूल जाते हैं कि इस तरीके से कमरे के अंदर का नम माहौल कीटाणु के लिए स्टोरहाउस जैसा काम करता है।  व्यक्ति को प्रतिदिन ताज़ी हवा, ताजा प्रकाश, धूप (सन बाथ) विशेष कर सर्दी के इस मोसम में, भी  लेना ज़रूरी होता है। इससे विषाणुओं का नष्ट करना आसान हो जाता है|
अपने अलग निजी तौलिया का इस्तेमाल करें:-
हाथों को साफ करने के लिए किचन और बाथरूम में पेपर की तौलिया का इस्तेमाल करना अच्छा है, या प्रत्येक सदस्य के अपने प्रतिदिन साफ किये जाने वाले निजी रुमाल, तोलिये ही प्रयोग में लाये जाये| घर में प्रत्येक सदस्य की अलग अलग तौलिया होने से कीटाणु फैल नहीं सकते |
कुछ भाई जुकाम में अल्कोहल (शराब-ब्रांडी) आदि लेने की सलाह देते हें| इन सबके बार-बार और अधिक पीने से प्रतिरक्षा प्रणाली का ह्रास हो जाता है| अल्कोहल शरीर में शुष्की पैदा करता है और इससे कीटाणु को बढ़ने में आसानी होती है|
अपने चेहरे को बार बार ना छूएं -
कुछ व्यक्तियों की आदत होती है की वे अपने मुहं नाक आदि को जाने अनजाने बार-बार छूते रहते हें, नाक और मुंह को बार बार ना छूएं, क्‍योंकि ऐसे में अगर आपके आसपास किसी को कोल्ड हुआ हो तो आपको भी कोल्ड होने की सम्भावना बढ़ जाती है।
क्या खाना चाहिए?  
फाइटोकेमिकल्स फ्लू और कोल्ड से लड़ने में प्रभावी होते हें, इसके लिए व्यक्ति को अच्छे संतुलित भोजन के साथ पर्याप्त मात्रा में कच्चे फल और सब्ज़ियां भी खानी चाहिए क्योंकि यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए अच्छे होते हैं। इसमें गहरे हरे, पीले और लाल रंग की सब्ज़ियां आती हैं जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को अधिक सक्षम बनाते हें| फ़ास्ट फ़ूड चाट कचोरी आदि पोषण में कमी कर रोग को बढ़ने का करण बनतीं हैं|
दोनों समय ब्रश करना,और गला साफ करना विषाणु को गले के टोंसिल्स पर और दातो के बीच फसे अन्न कणों में बढने का मोका नहीं देता, और रोग हो ही नहीं पाताप्रतिदिन मोसम अनुसार ठंडे या गरम पानी से स्नान भी आवश्यक है| अक्सर कई लोग जुकाम होने पर नहीं नहाते, इससे विषाणु और बढ़ते जाते हें| याद रखें की सारे शरीर की सफाई, रोज धुले कपडे पहनना अति आवश्यक है|   
तुलसी, अदरक,केशर, असगंध, आदि भी यही कार्य करती हें| इन्हें चाय के स्था या अलग से काढ़े के रूप में पीना लाभदायक होता है|
नाक में षडविन्दु तैल, और सामान्य कान में हिन्ग्वादी तैल रोज डालने से जुकाम ठीक होता है|
जुकाम सर्दी होने पर अक्सर पैट ख़राब रहता है, शोच ठीक से नहीं होती, अतः यदि पार्टी सप्ताह अरंड तैल, पंचसकार चूर्ण, आदि का जुलाब ले लिया जाये जुकाम जल्दी ठीक होता है| आप अपने कोष्ठ के अनुसार चिकित्सक की सलाह से जुलाब ओषधि ले सकते हें| जुलाब नहीं लेना हो तो त्रिफला चूर्ण, हरड चूर्ण आदि रोज भी ले सकते हें|     


समस्त चिकित्सकीय सलाह रोग निदान एवं चिकित्सा की जानकारी ज्ञान(शिक्षण) उद्देश्य से हे| प्राधिकृत चिकित्सक से संपर्क के बाद ही प्रयोग में लें|

Saturday, 5 November 2016

सर्दी, खांसी, सिरदर्द, जुकाम

सर्दी, खांसी, सिरदर्द, जुकाम जैसी कुछ बीमारियां होती हैं जो किसी को भी किसी भी समय हो सकती है। खांसी की समस्या होने पर आप सुकून से कोई काम नहीं कर सकते हैं। खांसी बदलता मौसम, ठंडा-गर्म खाना पीना या फिर धूल या किसी अन्य चीज से एलर्जी के कारण सकती है । खांसी होने पर तकलीफ भी ज्यादा होती है। आइए हम आपको खांसी से बचने के कुछ आसान से उपायों के बारे में बताते हैं।

*सौंठ को पीस कर पानी में खूब देर तक उबालें। जब एक चौथाई रह जाए तो इसका सेवन गुनगुना होने पर दिन में तीन चार बार करें। तुरंत फायदा होगा।

*गुनगुने पानी से गरारे करने से गले को भी आराम मिलता है और खांसी भी कम होती है।

*तुलसी पत्ते, 5 काली मिर्च, 5 नग काला मनुक्का, 6 ग्राम गेहूँ के आटे का चोकर , 6 ग्राम मुलहठी, 3 ग्राम बनफशा के फूल लेकर 200 ग्राम पानी में उबालें। 1 /2 रहने पर ठंडा कर छान लें। फिर गर्म करके बताशे डालकर रात सोते समय गरम-गरम पी जाएँ और चादर ओढ़कर सो जाएँ तथा हवा से बचें। कैसी भी खुश्क खाँसी हो, ठीक हो जाएगी।

*काली मिर्च, हरड़े का चूर्ण, तथा पिप्पली का काढ़ा बना कर दिन में दो बार लेने से खाँसी जल्दी दूर होती है।

*1 चम्मच शहद में पिसी हुई कालीमिर्च मिलाकर पीने से भी खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है|

*1 चम्मच अदरक का रस में एक चोथाई शहद एवं चुटकी भर हल्दी मिलाकर लेने से खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है।

*मूली का रस और दूध को बराबर मिलाकर 1 -1 चम्मच दिन में छह बार लेने से भी शीघ्र लाभ मिलता है ।

*हींग, काली मिर्च और नागरमोथा को पीसकर गुड़ के साथ मिलाकर गोलियाँ बना लें। प्रतिदिन भोजन के बाद दो गोलियों का सेवन करने से खाँसी और कफ में लाभ मिलता है ।

1 चम्मच अजवाइन एवं हल्दी मिलाकर गरम कर ले,फिर उसे ठंडा होने के बाद शहद मिलाकर पीने से खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है।खांसी होने पर सेंधा नमक की डली को आग पर अच्छे से गरम कर लीजिए। जब नमक की डली गर्म होकर लाल हो जाए तो तुरंत आधा कप पानी में डालकर निकाल लीजिए। उसके बाद इस नमकीन पानी को पी लीजिए। ऐसा पानी 2-3 दिन सोते वक्त पीने पर खांसी समाप्त हो जाती है।

*शहद, किशमिश और मुनक्के को मिलाकर लेने से खांसी जल्दी ही ठीक हो जाती है।

*हींग, त्रिफला, मुलेठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर चाटने से भी खांसी में फायदा मिलता है।

*भुने हुए चने को कालीमिर्च के साथ खाने से खांसी बहुत जल्दी गायब हो जाती है।

*त्रिफला में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर पीने से हर तरह की खांसी में फायदा होता है।

*तुलसी, कालीमिर्च और अदरक की चाय पीने से भी खांसी शीघ्र ही समाप्त होती है।

*पानी में नमक, हल्द‍ी, लौंग और तुलसी पत्ते उबालें। इस पानी को छानकर रात को सोते समय गुनगुना पिएँ। इसके लगातार सेवन से 7 दिनों के अंदर खाँसी पूरी तरह से समाप्त हो जाती है ।

*खांसी होने पर खांसी को रोकने के लिए मूंगफली,चटपटी व खट्टी चीजें, ठंडा पानी, दही, अचार, खट्टे फल, केला, कोल्ड ड्रिंक, इमली, तली-भुनी चीजों को खाने से बचना चाहिए ।

*सूखी खांसी में काली मिर्च को पीसकर घी में भूनकर लेना भी बहुत उत्तम रहता है।

*पान का पत्ता और थोड़ी-सी अजवायन , चुटकी भर काला नमक व शहद मिलाकर लेना भी खांसी में लाभ देता है।

*बताशे में काली मिर्च डालकर चबाने से भी खांसी में बहुत शीघ्र कमी आती है।...

Tuesday, 16 August 2016

जुकाम♦🐚 ➰➰➰➰➰➰

जुकाम से बार-बार आक्रान्त होने की व्याधि  असंख्य नर-नारियों में पायी जाती है। इसका कारण आहार-बिहार का प्रदूषण,  भोजन में अम्ल और मधुर रसों का अति सेवन है। खच्चे, नमकीन, चटपटे, गुड़, बूरा, अन्यान्य मिठाइयाँ एवं फास्टफूड के अति सेवन से रस धातु दूषित हो जाती है अथवा इसकी अतिशय वृद्धि हो जाती है। उपद्रवस्वरूप स्न्नोफीलिया,
श्वसन एलर्जी एवं ब्रंकियल अस्थमा-यक्ष्मा में परिणत होती है।पाश्चात्त्य चिकित्सा पद्धति में इससे स्थायी रूप से छुटकारा पाने के लिए अब तक कोई चिकित्सा नहीं है। यहाँ एक सिद्ध योग दिया जा रहा है, जिससे रोगियों को लाभ मिलेगा —
🔹रसमाणिक्य                     20 ग्राम
🔹महालक्ष्मीविलास रस          5 ग्राम
🔹अभ्रकभस्म सहस्रपुठित      2 ग्राम
🔹लघु बसंतमालती                 5 ग्राम
🔹बृहत् श्रृंगारारस                 10 ग्राम
🔹प्रवालपिष्टि                       10 ग्राम
🔹तालिसादि चूर्ण                 50 ग्राम
🔹पुष्करमूल चूर्ण                  50 ग्राम
इन समस्त औषधियों को को एक घंटा खरलकर चालिस पुड़िया बना लें। 1-1 पुड़िया सुबह-शाम मधु से लें। दशमूलारिष्ट और द्राक्षारिष्ट 2-2 चम्मच दूना जल मिलाकर खाने के बाद लें। अगस्त्य हरितकी एक चम्मच रात को एक गिलास उष्ण जल से लेने के बाद आधा किलो गोदुग्धादि पीवें। दुग्ध में दो बड़ी पीपर उबालना लें। पित्त प्रवृति हो तथा उष्णता अधिक प्रतीत हो एक छोटी पीपर उबाल कर पीवें। आवश्यकतानुसार 2 से 4 माह तक इनके सेवन से जीवन भर के लिए जुकाम से निवृति हो जाती है।

Monday, 8 August 2016

नजला जुकाम ★

प्यारे साथीओं मौसम बदलते ही नजला जुकाम एलर्जी बहुत प्रेशान कर देती है ।
कई मित्र तो इस समस्या से दो- चार होते ही रहते है ।
👉🏻एक घरेलु प्रयोग बता रहा हुँ :-
अदरक का रस एक या दो चम्मच ,
तुलसी के पत्तों का रस 1 चम्मच ,
एक चम्मच शहद ,
पाँच काली मिर्च
यह चारों को अाप मिक्श करके चाट लें । दिन में दो या तीन बार लेने से बहुत लाभ होगा ।
👉🏻एक आयुर्वेदिक दवा जो आपको खुद बनानी पढैगी - ⚡
सफेद फिटकरी को आक के दूध में घोटकर भस्म करलें + धतूरे के पत्तों के रस में घोटकर सुखा कर कुजे में डालकर भस्म करलें । + पुठकंडा के सर्वाग रस में घोटकर भस्म करलें । + घी ग्वार के रस में घोटकर भस्म कर लें ।
👉🏻फिर इसे पीसकर कपड़छान करके काँच की हवाबंद शीशी में डाल कर रख लें ।
250mg से 1Gm तक शहद से चटवाएं ।
👉🏻अगर कफ जमा हुआ है तो बहेड़ा छिलका का कपड़छान चूर्ण मिलाकर थोड़ा सफेद मुसबर की भस्म मिलाकर लेने से बहुत ही लाभ मिलेगा । शत् प्रतिशत लाभ मिलता है ।
👉🏻 जो लोग यह न बना सकते हो वो महालक्षमी विलास रस 1 गोली
अगर साथ में बुखार हो तो त्रिभुवनकीर्ति रस 2 गोली ,
अगर खांसी है तो अभर्क भस्म + सितोपलादि चूर्ण मिलाकर शहद से चाट लें ।
अगर आँखों में जलन है तो सप्तामर्त लौह ½ या 1 ग्राम के साथ लें ।
👉🏻पुदीन हरा डाबर की गोली को उबलते पानी में डालकर + नाक पर लगाने से बंद नाक खुल जाती है ।
👉🏻इलाची बीज ,नौशादर ,अजवायन ,कपूर टिकी को कपड़े में लपेट पोटली सी बनाकर पास रखें । बार-बार सूंघने से बहुत लाभ होगा ।
👉🏻नाक में रोगन बादाम हमदर्द का या वैद्यनाथ षडबिंदु तैल नश्य लेने से बेहद लाभ होता है ।
👉🏻कानों में सरसों का तैल गुनगुना करके जरूर डालें । तरावट आएगी खुश्की दूर होगी ।
इसके इलावा आप हमदर्द की नजली ,लयूक सपिसता,वासावलेह ,चयवनप्राश स्पैशल ,लक्षमी विलास रस नारदीय ,कफकेतु रस ,कनकासव आदि भी ले सकते है