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Friday, 24 March 2017

TB

टी बी की बीमारी का घरेलू उपचार

1) लहसुनयह कीटाणुओं का नाश करती है। इसमें एंटीबैक्‍टीरियल गुण होते हैं साथ ही यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। इसे कच्‍चा या पका कर खाना चाहिये। इसे खाने का एक तरीका है कि 10 लहुसन की कलियों को एक कप दूध में उबाल लें। फिर उबली हुई कलियों को चबा कर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। ऐसा कुछ दिनों के लिये करें। पानी ना पियें नहीं तो यह असर नहीं करेगी।
2) केलाकेले में अच्‍छी मात्रा में कैल्‍शियम पाया जाता है जिससे टीबी के रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह कफ और बुखार को दूर भगाता है। रोगी को 1 गिलास कच्‍चे केले का जूरोजाना पीना चाहिये।
3) काली मिर्चकाली मिर्च फेफड़े की सफाई करती है और टीबी की वजह से होने वाले दर्द को दूर करती है। 10 काली मिर्च के दाने को घी के साथ फ्राई कर लें। फिर उसमें एक चुटकी हींग पावडर डाल कर मिक्‍स कर के ठंडा कर लें। मिश्रण को 3 भाग में बांटें और एक डोस को हर एक घंटे में चबाएं।
4) आमलायह शरीर को कई तरह के पोषण पहुंचा कर उसे मजबूती प्रदान करता है। इसका जूस निकाल कर उसमें एक चम्‍मच शहद मिला कर रोजाना खाली पेट पीन से यह बीमारी दूर होती है।
5) संतराएक गिलास ताजे संतरे के रस में एक चुटकी नमक और एक चम्‍मच शहद मिक्‍स कर के पियें। इसे दिन में दो बार पियें।

Sunday, 9 October 2016

घरेलू उपचार

सोंठ जल .

......:पानी की पतीली में एक पूरी साबूत सोंठ डालकर पानी गरम करें। जब अच्छी तरह उबलकर पानी आधा रह जाये तब उसे ठंडा कर दो बार छानें। ध्यान रहे कि इस उबले हुए पानी के पैंदे में जमा क्षार छाने हुए जल में न आवे। अतः मोटे कपड़े से दो बार छानें। यह जल पीने से पुरानी सर्दी,दमा, टी.बी.,श्वास के रोग,हाँफना,हिचकी, फेफड़ों में पानी भरना, अजीर्ण अपच,कृमि, दस्त,चिकना आमदोष, बहुमूत्र, डायबिटीज लो ब्लड प्रेशर,शरीर का ठंडा रहना, मस्तक पीड़ा जैसे कफदोषजन्य तमाम रोगों में यह जल उपरोक्त रोगों की अनुभूत एवं उत्तम औषधि है। यह जल दिनभर पीने के काम में लावें। रोग में लाभप्राप्ति के पश्चात भी कुछ दिन तक यह प्रयोग चालू ही रखें।

धनिया-जल ........

.......एक लीटर पानी में एक से डेढ़ चम्मच सूखा (पुराना) खड़ा धनिया डालकर पानी उबालें। जब ७५० ग्राम जल बचे तो ठंडा कर उसे छान लें। यह जल अत्यधिक शीतल प्रकृति का होकर पित्तदोष,गर्मी के कारण होने वाले रोगों में तथा पित्त की तासीर वाले लोगों को अत्यधिक वांछित लाभ प्रदान करता है। गर्मी-पित्त के बुखार पेट की जलन, पित्त की उलटी,खट्टी डकार अम्लपित्त पेट के छाले, आँखों की जलन,नाक से खून टपकना रक्तस्राव, गर्मी के पीले-पतले दस्त, गर्मी की सूखी खाँसी अति प्यास तथा खूनी बवासीर (मस्सा) या जलन-सूजन वाले बवासीर जैसे रोगों में यह जल अत्यधिक लाभप्रद है। अत्यधिक लाभ के लिए इस जल में मिश्री मिलाकर पियें। जो लोग कॉफी तथा अन्य मादक पदार्थों का व्यसन करके शरीर का विनाश करते हैं उनके लिए इस जल का नियमित सेवन लाभप्रद तथा विषनाशक है।              

   अजवाइन जल .......

 एक लीटर पानी में ताजा नया अजवाइन एक चम्मच (करीब ८.५ ग्राम) मात्रा में डालकर उबालें। आधा पानी रह जाय तब ठंडा करके छान लें व पियें। यह जल वायु तथा कफ दोष से उत्पन्न तमाम रोगों के लिए अत्यधिक लाभप्रद उपचार है। इसके नियमित सेवन से हृदय की शूल पीड़ा,पेट की वायु पीड़ा, आफरा,पेट का गोला,हिचकी, अरुचि,मंदाग्नि पेट के कृमि, पीठ का दर्द अजीर्ण के दस्त, कॉलरा सर्दी बहुमूत्र, डायबिटीज जैसे अनेक रोगों में यह जल अत्यधिक लाभप्रद है। यह जल उष्ण प्रकृति का होता है।                        

जीरा जल ....

..... एक लीटर पानी में एक से डेढ़ चम्मच जीरा डालकर उबालें। जब ७५० ग्राम पानी बचे तो उतारकर ठंडा कर छान लें। यह जल धना जल के समान शीतल गुणवाला है। वायु तथा पित्तदोष से होने वाले रोगों में यह अत्यधिक हितकारी है। गर्भवती एवं प्रसूता स्त्रियों के लिए तो यह एक वरदान है। जिन्हें रक्तप्रदर का रोग हो,गर्भाशय की गर्मी के कारण बार-बार गर्भपात हो जाता हो अथवा मृत बालक का जन्म होता हो या जन्मने के तुरंत बाद शिशु की मृत्यु हो जाती हो, उन महिलाओं को गर्भकाल के दूसरे से आठवें मास तक नियमित जीरा-जल पीना चाहिए। एक-एक दिन के अंतर से आनेवाले,ठंडयुक्त एवं मलेरिया बुखार में,आँखों में गर्मी के कारण लालपन हाथ पैर में जलन,वायु अथवा पित्त की उलटी (वमन), गर्मी या वायु के दस्त, रक्तविकार श्वेतप्रदर,अनियमित मासिक स्राव गर्भाशय की सूजन कृमि,पेशाब की अल्पता इत्यादि रोगों में इस जल के नियमित सेवन से आशातीत लाभ मिलता है। बिना पैसे की

औषधि...

. इस जल से विभिन्न रोगों में चमत्कारिक लाभ मिलता है।

Tuesday, 26 July 2016

एसिडिटी के लिए घरेलू उपचार


आजकल की भागदौड भरी और अनियमित जीवनशैली के कारण पेट की समस्या आम हो चली है। आमतौर पर तली-भुनी और मसालेदार खाने का सेवन करने के कारण एसिडिटी की समस्या होती है। खाने का एक समय निर्धारित भी नहीं होता है, जो एसिडिटी का कारण बनता है। पेट में जब सामान्य से अधिक मात्रा में एसिड निकलता है तो उसे एसिडिटी कहते हैं। आइए हम आपको कुछ ऐसे घरेलू उपाय बताते हैं जिनको अपनाकर आप एसिडिटी से छुटकारा पा सकते हैं।

एसिडिटी के लिए घरेलू नुस्खे –

एसिडिटी होने पर मुलेठी का चूर्ण या काढ़ा बनाकर उसका सेवन करना चाहिए। इससे एसिडिटी में फायदा होता है।
नीम की छाल का चूर्ण या रात में भिगोकर रखी छाल का पानी छानकर पीना चाहिए। ऐसा करने से अम्लापित्त या एसिडिटी ठीक हो जाता है।
एसिडिटी होने पर त्रिफला चूर्ण का प्रयोग करने से फायदा होता है। त्रिफला को दूध के साथ पीने से एसिडिटी समाप्त होती है।
दूध में मुनक्का डालकर उबालना चाहिए। उसके बाद दूध को ठंडा करके पीने से फायदा होता है और एसिडिटी ठीक होती है।
एसिडिटी के मरीजों को एक गिलास गुनगुने पानी में चुटकी भर काली मिर्च का चूर्ण तथा आधा नींबू निचोड़कर नियमित रूप से सुबह पीना चाहिए। ऐसा करने से पेट साफ रहता है और एसिडिटी में फायदा होता है।
सौंफ, आंवला व गुलाब के फूलों को बराबर हिस्से में लेकर चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण को आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम लेने से एसिडिटी में फायदा होता है।
एसिडिटी होने पर सलाद के रूप में मूली खाना चाहिए। मूली काटकर उसपर काला नमक तथा कालीमिर्च छिडककर खाने से फायदा होता है।
जायफल तथा सोंठ को मिलाकर चूर्ण बना लीजिए। इस चूर्ण को एक-एक चुटकी लेने से एसिडिटी समाप्त होती है।
कच्चे चावल के 8-10 दानों को पानी के साथ सुबह खाली पेट गटक लीजिए।

एसिडिटी होने पर कच्ची सौंफ चबानी चाहिए। सौंफ चबाने से एसिडिटी समाप्त हो जाती है।
अदरक और परवल को मिलाकर काढा बना लीजिए। इस काढे को सुबह-शाम पीने से एसिडिटी की समस्या समाप्त होती है।
सुबह-सुबह खाली पेट गुनगुना पानी पीने से एसिडिटी में फायदा होता है।
नारियल का पानी पीने से एसिडिटी की समस्या से छुटकारा मिलता है।
लौंग एसिडिटी के लिए बहुत फायदेमंद है। एसिडिटी होने पर लौंग चूसना चाहिए।
गुड़, केला, बादाम और नींबू खाने से एसिडिटी जल्दी ठीक हो जाती है।
पानी में पुदीने की कुछ पत्तियां डालकर उबाल लीजिए। हर रोज खाने के बाद इन इस पानी का सेवन कीजिए। एसिडिटी में फायदा होगा।



एसिडिटी की समस्या खान-पान के कारण ज्यादा होती है। इसलिए ज्यादा गरिष्ठ भोजन करने से परहेज करना चाहिए। एसिडिटी के समय रात को सोने से तीन घंटे पहले डिनर कर लेना चाहिए, जिससे खाना अच्छे से पचे। इन नुस्खों को अपनाने के बाद भी एसिडिटी अगर ठीक न हो रही हो तो चिकित्सक से संपर्क अवश्य कीजिए।