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Saturday, 11 February 2017

चाहे कैसे भी दाद, खाज, खुजली क्यों न हो, इन सभी को जड़ से मिटाने के घरेलु रामबाण उपाय

दाद, खाज, खुजली एक गंभीर चर्म रोग है। यदि समय से इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह त्वचा पर अपनी जड़ें जमा लेता है और कितना भी एंटी फ़ंगल क्रीम लगाएं, ठीक होने के कुछ दिन के बाद पुन: हो जाता है। खासतौर से गुप्तांगों के आसपास यह तेज़ी से फैलता है। जब दाद के बाद काले निशान पड़ जाते हैं तो उसे एक्ज़िमा कहते हैं।

दाद, खाज, खुजली के कारण :

रसायनिक चीज़ों – साबुन, चूना, सोडा, डिटर्जेंट आदि का ज़्यादा प्रयोग, कब्ज़, रक्त विकार, महिलाओं में मासिक धर्म की गड़बड़ी और किसी दाद, खाज, खुजली वाले व्यक्ति के कपड़े पहनने से यह रोग हो सकता है।
लक्षण : इस रोग में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने निकल आते हैं, इनमें खुजली होती है और खुजलाने के बाद जलन होती है। बाद में ये दाग़ के रूप में फैलने लगते हैं। यदि पूरे शरीर में एक्ज़िमा हो गया है तो बुखार भी आ सकता है।
बचाव

– जिन्हें दाद, खाज, खुजली हो गई है उन्हें सबसे पहले चाहिए कि नहाते वक़्त साबुन, शैंपू आदि का इस्तेमाल बंद कर दें। यदि ज़रूरी हो तो नहाने में ग्लिसिरीन सोप का इस्तेमाल करें। नहाने के बाद नारियल का तेल लगाएं।
– यदि पुराना दाद, खाज, खुजली है तो एंटी फ़ंगल क्रीम का प्रयोग कुछ दिनों तक लगातार करें, आमतौर पर लोग एंटी फ़ंगल क्रीम लगाते हैं और थोड़ा ठीक होने पर लगाना बंद कर देते हैं, इससे दाद और ज़िद्दी हो जाता है।
– कपड़े साफ़ करते वक्त अच्छी तरह धुल लेना चाहिए, उसमें डिटर्जेंट का थोड़ा सा भी अंश नहीं होना चाहिए। पूरी तरह सूख जाने के बाद ही पहनें।
– एक्ज़िमा में समुद्र के पानी से नहाना श्रेयष्कर है।
– नमक का सेवन बंद कर दें, यदि ज़रूरी हो तो बहुत कम मात्रा में नमक लें।
– पानी में नीम के पत्तों को उबाल कर स्नान करने से आराम मिलता है और एक्ज़िमा के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं।
– दाद, खाज, खुजली में खट्टे, चटपटे व मीठी चीज़ों के सेवन से बचें। जली कटी त्वचा का घरेलू उपचार
– यदि खुजलाने के बाद उसमें से पानी निकलता है या पसीजता है तो उस पर पानी का प्रयोग न करें।
उपचार :

– अनार के पत्तों को पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाता है।
– दाद को पहले खुजला लें और फिर उसपर नींबू का रस लगा दें। दिन में तीन-चार बार ऐसा करने से कुछ ही दिनों दाद चला जाता है।
– केले का गूदा मसलकर उसमें नींबू का रस मिला लें और दाद पर लगा दें, कुछ दिनों के नियमित प्रयोग से दाद समाप्त हो जाएगा।
– बथुआ की सब्ज़ी खाने व उसे उबालकर उसका रस निचोड़कर पीने से किसी भी प्रकार के चर्म रोग में लाभ मिलता है।
– गाजर को घिस लें और उसमें सेंधा नमक डालकर हल्का गरम कर लें, इसे दाद पर नियमित लगाने से दाद जड़ से चला जाता है।
– कच्चे आलू का रस पीने से दाद ठीक हो जाता है।
– सूखे सिंखाड़े को नींबू के रस में घिस कर लगाने से दाद, खाज, खुजली दूर हो जाती है। इसे लगाने पर पहले जलन होगी लेकिन बाद में ठंडा करता है।
– हल्दी का लेप लगाने से भी दाद ठीक हो जाता है। इसे दिन में तीन बार और रात को सोते समय एक बार लगाएं।
– गर्म पानी में अजवाइन पीसकर लगाने या अजवाइन को पानी में मिलाकर धोने से दाद चला जाता है।
– नीम के पत्तों का रोज़ 12 ग्राम रस पीने से दाद ठीक हो जाता है। एलर्जी दूर करने के आयुर्वेदिक
– गुलकंद व दूध पीने से भी लाभ होता है।
– दाद, खाज, खुजली को जड़ से समाप्त करने के लिए नीम की पत्ती को दही के साथ पीसकर लगाया जाता है। यह बहुत ही कारगर औषधि है।
– गेंदे की पत्तियों को पानी में उबालकर प्रभावित जगह पर दिन में तीन-चार बार लगाएं। गेंदे के फूल में एंटी बैक्टीरियल व एंटी वायरल तत्व होते हैं जो चर्म रोग को दूर करने में सहायक होते हैं।
पकने वाले दाद के उपचार :

त्रिफला को तवे पर रखकर राख होने तक गरम करें और उसके ऊपर एक कटोरी उल्टी करके रख दें ताकि उसका भाप या धुंआ बाहर न जाकर त्रिफला की भस्म में ही रम जाए। पूरी तरह जल जाने पर उसे उतार लें और मसलकर उसकी भस्म बना लें। भस्म में समान मात्रा में थोड़ी सी फिटकरी, वनस्पति घी, देशी घी, सरसो का तेल व पानी मिलाकर खरल में अच्छी तरह मर्दन करें। अब मलहम तैयार है। पकने वाले व स्राव युक्त दाद के लिए यह रामबाण औषधि है।
 ज़िद्दी व रूखे दाद के उपचार :

ज़िद्दी व रूखे दाद को जड़ से समाप्त करने के लिए समान मात्रा में पलाश के बीज, मुर्दाशंख, सफ़ेदा, कबीला, मैनशिल व माजु फ़ल लें, उसमें करंज के पत्तों का रस और नींबू का रस मिलाकर खरल में पूरे दिन मर्दन करें। इसके बाद इसकी गोली बनाकर सुखा लें और प्रभावित स्थान पर गुलाब जल के साथ घिसकर इसे लगाएं।

ज़िद्दी दाद के लिए घरेलू तेल :

पचास ग्राम गंधक लेकर उसे पीस लें। लगभग 6-9 इंच चौड़े व 12- 18 इंच लंबे साफ़ सूती कपड़े में गंधक को फैलाकर अच्छे तरह से बेलनाकार रोल कर लें। फिर सूती धागे से इसे अच्छी तरह बांध दें। यह रस्सी के आकार को हो गया। इसे दो फुट ऊंची लकड़ी की छड़ी से बांध दें। अब इस गंधक वाली कपड़े की रस्सी में जितना सरसो का तेल सोख सके, उतना तेल लगाएं। अब उस रस्सी के नीचे एक बड़ी कटोरी रख दें और गंधक वाली कपड़े की रस्सी को नीचे से जला दें। उसके जलने से तेल टपक कर कटोरी में गिरेगा। जब रस्सी जलकर ख़त्म हो जाए या तेल गिरना बंद हो जाए तो कटोरी को हटा लें और उसे छानकर किसी कांच की शीशी में रख लें।
पुराने से पुराने दाद, खाज, खुजली पर इसके नियमित प्रयोग करने से रोग समाप्त हो जाता है। ध्यान रहे कि जब रस्सी जल रही हो तो उसके धुएं से दूर रहें तथा इस तेल को खुले घावों पर न लगाएं और न ही यह किसी तरह आंखों के संपर्क में आने दें।
दाद को किसी मोटे व रूखे कपड़े से खुजलाकर उसपर यह तेल लगाएं और उसपर पीपल या केले का पत्ता रखकर पट्टी बांध दें। कुछ ही दिन के प्रयोग से ज़िद्दी दाद भी चला जाएगा।
शरीर में खुजली से प्रभावित स्थानों पर यह तेल लगाकर उसे भांप से सेकें। यदि पूरे शरीर में खुजली हो तो यह तेल लगाकर धूप में बैठना चाहिए और एक घंटे बाद गर्म पानी से नहा लेना चाहिए।

Thursday, 21 July 2016

दाद और खुजली की घरेलू चिकित्सा


दाद और खुजली, यह त्वचा संबंधी रोग है जिसकी वजह से काफी परेशानी होती है। आइये आपको इन रोगों के लक्षणों और इनके कारगर घरेलू उपायों के बारे में बताते हैं जो इन बीमारीयों को दूर करेगा।
दाद के लक्षण
दाद यह त्वचा का रोग है जो आपकी त्वचा पर फफूंद के रूप में दिखता है और इसका आकार गोल व रंग लाल होता है जो धीरे-धीरे बढ़ने भी लगता है। दाद त्वचा, बालों और नाखूनों को प्रभावित करता है।
दाद के कारण
1. यह संक्रमित व्यक्ति को छूने से या उसके तौलिए का इस्तेमाल करने से भी हो सकता हैं।
2. कुत्ता, बिल्ली या अन्य पालतू जानवरों की संक्रमित त्वचा के संपर्क में आने से भी दाद फैल सकता है।
दाद का इलाज
तुलसी के पत्तों को पीसकर उसका पेस्ट बनाएं और इसे दाद वाले स्थान पर मलें।
दाद होने पर आप उसकी ठंठे पानी और गरम पानी दोनों की बारी-बारी से सिंकाई करें।
अपना बिस्तर हमेशा साफ रखें।
. साफ सुथरे कपड़े पहनें और भोजन सादा खायें।
. आप नीम के पत्तों को पीसकर उसका लेप तैयार करें और इस लेप को दाद वाले स्थान पर मलें।
नहाने के पानी में नीम की पत्तीयां डालकर स्नान करें और स्नान रोज करें।
कपड़े साफ और सूखे पहने क्योंकि गीला कपड़ा पहने से दाद का आकार बढ़ता है।
खुजली-
खुजली यह भी त्वचा संबंधी रोग है और त्वचा को ज्यादा रगड़ने से त्वचा पर जलन भी होती है। आइये जानते है इसके कारण और इलाज-
खुजली होने की वजह-
दवाई के गलत असर होने से।
गलत तरह से यौन संबंध बनाने से।
संक्रमित जानवर के संपर्क में आने से।
सिर पर जुंओं की वजह से।
पसीना आने की वजह से।
. तनाव की वजह से।
खुजली दूर करने के उपचार
टमाटर के मिश्रण में नारियल का पानी मिला कर खुजली वाली जगह पर लगाने से खुजली दूर होती है।
खुजली यदि पूरे शरीर में हो रही है तो आप दूध की मलाई को खुजली वाले स्थानों पर लगायें।
नीम के पत्तों का लेप लगाने से खुजली से निजात मिलता है।
खुजली वाली जगह पर नारियल का तेल लगाने से आराम मिलता है।
चर्म रोग का तेल बनाने की विधि : नीम की छाल, चिरायता, हल्दी, लाल चन्दन, हरड़, बहेड़ा, आँवला और अड़ूसे के पत्ते, सब समान मात्रा में। तिल्ली का तेल आवश्यक मात्रा में। सब आठों द्रव्यों को 5-6 घंटे तक पानी में भिगोकर निकाल लें और पीसकर कल्क बना लें।
पीठी से चार गुनी मात्रा में तिल का तेल और तेल से चार गुनी मात्रा में पानी लेकर मिलाकर एक बड़े बरतन में डाल दें। इसे मंदी आंच पर इतनी देर तक उबालें कि पानी जल जाए सिर्फ तेल बचे। इस तेल को शीशी में भरकर रख लें।
जहाँ भी खुजली चलती हो, दाद हो वहाँ या पूरे शरीर पर इस तेल की मलिश करें। यह तेल चमत्कारी प्रभाव करता है। लाभ होने तक यह मालिश जारी रखें, मालिश स्नान से पहले या सोते समय करें और चमत्कार देखें।