Saturday, 10 December 2016

पपीते के बीज (Papaya Seeds)

कैसे खाएं पपीते के बीज (Papaya Seeds)

आजकल लोग पपीते के बीजों को स्वास्थ्य के लिए अच्छा, या एक हेल्थ फूड मानने लगे हैं। आप पपीते के बीजों को सप्लीमेंट या संपूरक जैसे साबुत खा सकते हैं, या बीजों को पीसकर काली मिर्च की जगह इस्तेमाल कर सकते हैं क्योंकि दोनों के स्वाद में काफी समानता है।

एक छोटा पपीता चुनें: ज्यादातर छोटे पपीतों के बीजों का स्वाद ज्यादा तेज़ नहीं होता है और बड़े पपीतों के बीज कटु होते हैं।जब आप पपीते के बीज के स्वाद को अभ्यस्त हो जायेंगे, आपको हर समय छोटे पपीते ढूँढने की जरूरत नहीं होगी और आप बड़े पपीते ले सकते हैं। छोटे पपीतों से शुरू करने से आपको उसके स्वाद की आदत हो जायेगी।

कुछ बीजों को यूँही चबाएं: पपीते के बीजों को साबुत खा सकते हैं, पर पहले हफ्ते में, एक दिन में सिर्फ एक या दो बीज चबाएं। अगर आप एकदम से बहुत ज्यादा खायेंगे, तो आपकी स्वादकलिका या टेस्टबड्स और पाचन तंत्र या डाइजेस्टिव सिस्टम पर अधिक जोर पड़ेगा।

शुरू में पपीते के बीजों का काली मिर्च जैसा कटु स्वाद ज्यादा तेज़ लग सकता है। इसलिए अगर आप जल्दी, एक बार में अत्यधिक खायेंगे तो आप निराश हो जायेंगे व आपका और खाने का मन नहीं करेगा।पपीते के बीजों को खाना सेफ या निरापद है पर जिस चीज की आपके पेट को आदत नहीं है, उसे अधिक मात्रा में खाने से पाचन खराब हो सकता है। धीरे से शुरू करके आप इससे बच सकते हैं।मात्रा को धीरे धीरे बढ़ाएं: दूसरे हफ्ते में, धीरे धीरे उसे प्रतिदिन चौथाई चम्मच, फिर आधा चम्मच, फिर एक पूरा चम्मच खाना शुरू करें।पपीते के बीजों को ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन के साथ खाएं ताकि आपका पाचन तंत्र आसानी से काम कर सके। ऐसा करने से आपको बीज के प्रोटियोलिटिक एंज़ाइम्स (proteolytic enzymes) का अधिकतम लाभ होगा और आपके पाचक स्वास्थ्य या डाइजेस्टिव हेल्थ में सुधार होगा।बीजों को शहद के साथ खाकर देखें: अगर आपके लिए पपीते के बीजों का ज्यादा कटु स्वाद अधिक तेज़ है तो आप साबुत बीजों को 1 छोटा चम्मच शहद के साथ खाएं ताकि वह ज्यादा कटु न लगे।पपीते के बीजों को शहद के साथ खाते समय भी, बीजों को निगलने से पहले कुछ बार चबाएं।लोग मानते हैं कि शहद और पपीते के बीजों का समुच्चय परजीवियों या पैरासाइट्स को नष्ट करता है। इसलिए पपीते के बीजों को शहद के साथ लेना स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।बीजों को पीसें: एक ऊखल और मूसल से, एक बार में 1 छोटा चम्मच पपीते के बीजों को पीसकर बारीक या मोटा पाउडर बनायें।आप चाहें तो ऊखल और मूसल इस्तेमाल करने की जगह साफ, सूखे बीजों को पेप्पर ग्राइंडर में पीस सकते हैं।उत्तम परिणाम के लिए, कुछ समय पहले पीसे हुए बीजों की जगह ताज़े पीसे हुए पपीते के बीज लें।जब आपको पीसी हुई काली मिर्च का उपयोग करना हो तो पपीते के पीसे हुए बीजों को इस्तेमाल करें: पीसे हुए पपीते के बीज काली मिर्च के बदले में अच्छा काम करते हैं। आप उन्हें उतनी ही मात्रा में इस्तेमाल कर सकते हैं।ध्यान रखें पपीते के बीजों का स्वाद एकदम काली मिर्च के समान नहीं होता है। कुछ लोग उसके स्वाद को काली मिर्च और राई के स्वाद के बीच का ब्लेंड मानते हैं। पर जब उसको थोड़ी मात्रा में काली मिर्च के बदले में खाने में डालते हैं तो खाने के स्वाद में कोई नकारात्मक असर नहीं होता है।पपीते के बीजों का सलाद बनायें: पपीते के बीजों को विनग्रैट ड्रेसिंग में मिलाएं जैसे आप पेप्पर विनग्रैट बनाने के लिए करते हैं। ये पपीते के बीजों को इस्तेमाल करने का एक और लोकप्रिय तरीका है।एक प्रकार की पपीते के बीजों की ड्रेसिंग बनाने के लिए 1 बड़ा चम्मच पपीते के बीज, चौथाई प्याला पपीता, चौथाई प्याला लाल प्याज, चौथाई प्याला ताज़ा हरा धनिया, लहसुन की 1 कली, 5 छोटे चम्मच अदरक, 2 बड़ा चम्मच ऐप्पल साइडर विनेगर, 1 नींबू का रस, 1 छोटा चम्मच शहद, चौथाई प्याला ऑलिव ऑयल, आधा छोटा चम्मच सी सॉल्ट, और आप चाहें तो एक चुटकी लाल मिर्च इस्तेमाल करें।सिर्फ तेल को छोड़कर बाकी सब संघटकों को ब्लेंडर में ब्लेंड करें जबतक वे द्रव या लिक्विड बन जाएँ।जब ब्लेंडर या फूड प्रोसेसर चल रहा हो, आप धीरे धीरे ऑलिव ऑयल डालें ताकि वह अच्छी तरह ब्लेंड हो जाये।इस रेसिपी से 1 प्याला पपीते के बीजों की ड्रेसिंग (papaya seed dressing) बनेगी। आप उसको सील और चिल करके एक हफ्ते तक रख सकते हैंअतिरिक्त बीजों को फ्रीज़र में रखें: अगर आप सारे पपीते के बीजों को शुरू के कुछ दिनों में खाने या इस्तेमाल करने की नहीं सोच रहे हैं तो उनको एक फ्रीज़र सेफ एयरटाइट कंटेनर में रखकर, फ्रीज़र में रखें।अगर आप पपीते के बीज नियमित रूप से खाते हैं तो आप उन्हें फ्रीज़र में रखने की जगह फ्रिज में रख सकते हैं। मान लीजिये आपको लगता है कि आप एक हफ्ते के अंदर सारे पपीते के बीजों को नहीं खा पायेंगे तो कुछ बीजों को फ्रीज़ करें।फ्रीज़ करके रखने से पपीते के बीजों के पौष्टिक तत्त्व 6 से 12 महीनों तक बने रहते हैं।बीजों को इस्तेमाल करने से पहले रात को फ्रिज में डिफ्रॉस्ट करें। नहीं तो आप फ्रीज़ करे हुए बीजों को कुछ क्षणों के लिए गर्म पानी में भिगो सकते हैं जबतक वे नरम हो जाएँ।

पपीते के बीज के ये 7 फायदे

आंखें फटी रह जाएंगी पपीते के बीज के ये 7 फायदे पढ़कर

पपीता पेट और त्वचा के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है। पपीते की तरह इसके बीजों के की भी कई स्वास्थ्य लाभ हैं। इनका इस्तेमाल दाद संक्रमण, कैंसर और बच्चों में पेट के कीड़े जैसी विभिन्न समस्याओं से निपटने के लिए किया जा सकता है।

पपीते  के बीज भी उतने ही अनमोल और पोषण से भरपूर हैं, जितना पपीता। आइए जानते हैं, पपीते के बीजों के खास गुण –

1 एंटी बैक्टीरियल – पपीते के बीज, एंटी बैक्टीरियल होते हैं, जो बीमारी फैलाने वाले जीवाणुओं से आपकी रक्षा करते हैं।

2 कैंसर से बचाव – पपीते के बीज में पाए जाने तत्व कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से आपकी रक्षा करते हैं। कैंसर से बचने के लिए पपीते के सुखाए गए बीजों को पीसकर प्रयोग किया जा सकता है ।

3 इंफेक्शन या एलर्जी – इंफेक्शन होने या शरीर के किसी भाग में जलन, सूजन या दर्द होने पर पपीते के बीज राहत देने का कार्य करते हैं।

4 लीवर – लीवर की समस्याओं से निजात दिलाकर पपीते के बीज उसे मजबूत बनाने का काम भी करते हैं। यह  लीवर के लिए बेहतर दवा साबित होते हैं।

5 किडनी – पपीते के बीज किडनी के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं। किडनी स्टोन और किडनी के ठीक तरीके से क्रियान्वयन में पपीते के बीज कारगर हैं।

6 बुखार – बुखार आने पर पपीते के बीज का सेवन काफी फायदेमंद होता है।  इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल तत्व बार- बार फैलने वाले जीवाणुओं से रक्षा करते हैं, और आपको स्वस्थ रखने में मदद करते हैं ।

7 पाचन तंत्र – पाचन तंत्र की मजबूती के लिए पपीते के बीज रामबाण इलाज है। इसके सेवन से पाचन ठीक से होता है, और पाचन संबंधी सारी समस्याएं खत्म हो जाती है।

सावधानी –

हालांकि गर्भवती महिलाओं को पपीते के बीज खाने से परहेज करना चाहिए. इससे गर्भपात होने का खतरा रहता है. इसके अलावा बहुत छोटे बच्चों को भी इसे खाने से परहेज करना चाहिए. पपीते के बीजों का सेवन करने के दौरान इस बात का ख्याल हमेशा रखना चाहिए कि इसकी मात्रा संतुलित हो.

इसके सेवन की विधि.

पपीते के बीज आप कभी भी किसी भी समय खा सकते हैं. या पपीता खाते समय पपीते के साथ भी खा सकते हैं. इसको एक से तीन चम्मच तक खाया जा सकता है

खर्राटे बंद करने के रामबाण उपाय.

खर्राटे बंद करने के रामबाण उपाय.

क्या आप या आपका जीवन साथी खर्राटों की वजह से परेशान हैं, और रात को आप इनसे बहुत परेशान होते हैं तो ये घरेलु उपाय आपके लिए रामबाण सिद्ध हो सकते हैं. खर्राटे निकलना सोने के समय एक आम बात है , परन्तु लम्बे समय तक इस प्रकार के समस्या के होने से लोगो पर इसका बुरा प्रभाव पड़ता है. वैसे तो खर्राटे निकलने के कई कारण है परन्तु इनके मुख्य कारणों में हमारे गले की श्वांस नली में संकुचन होना है. इसके इलावा जैसे श्वांस नली की उपरी दीवार जो हमारे नाक से जुडी होती है. उसमें सिकुड़न होना भी एक कारण है.

आइये जाने खर्राटों के महत्वपूर्ण कारण और इसके रामबाण इलाज.



खर्राटों के कुछ सामान्य कारण.

गले की श्वांस नली में संकुचन होना.
श्वांस नली की उपरी दीवार जो हमारे नाक से जुडी होती है. उसमें सिकुड़न होना.
हमारे सोने की तरीको से अर्थात लम्बे समय तक एक ही मुद्रा में सोने से ये समस्या उत्पन्न होती है.
ठन्डे मौसम के कारण.ठंडी चीजो के सेवन करने से.
धुम्रपान एवं अल्कोहल की अधिक मात्रा का सेवन से.
किसी कारणवश अगर गले में संक्रमण के कारण गले में सुजन होने पर भी खर्राटे आते है.

जानिये खर्राटे से सम्बंधित समस्या से बचने के 9 आसान रामबाण उपाए

1. अपने सोने की तरीको को बदले (try to change your sleeping habit ).

अगर आप को एक ही मुद्रा में सोने की अदत है तो ये आपको खर्राटें जैसी समस्याओ से ग्रसित कर सकती है | आप सोने के समय करवट बदल के सोने की प्रयास करे |

2. अपने नाक की साफ सफाई में ध्यान दे (keep your noise clean) ;

खर्राटे जैसी समस्याओ का मुख्य कारण हमारे श्वांस नली में पड़ने वाली बाधा है, जो नाक में जमी धुल मिट्टियों के कारण भी हो सकती है अत हमें हमारे नाक को साफ रखना चाहिए |

3. धूम्रपन से परहेज (avoid smocking);

धूम्रपन किसी भी शुरात में सेहत के लिए हानिकारक साबित होता है | अत इसके परहेज करने से भी खर्राटे जैसी समस्या से बचा जा सकता है |

4. गर्म पानी (drink hot water) ;

रोजाना सोने से पहले गर्म पानी पिए | इस्से गले की स्वांस नली खुलती है और खर्राटे नहीं आते है |

5. एक ग्लास गर्म पानी रोजाना सोने से पहले पिए |

गर्म पानी से गर्गिल (gargil with hot water) ; गर्म पानी से गर्गिल करने से गले में होने वाली सुजन से रहत मिलती है , जिससे भी खर्राटे होने से बचा जा सकता है |

6. गार्गल करें.

एक ग्लास गर्म पानी ले |
1 चम्मच नमक ले कर उस गर्म पानी में घोल दे |
दिन में दो बार सुबह उठने के बाद एवं रात में सोने से पहले पानी से गर्गिल करे |

7. शहद (honey)

शहद में कई प्रकार के medicinal गुण पाया जाता है| रोजाना शाहद के इस्तेमाल से गले में होने वाली तकलीफ दूर होती है | रोजाना 2 से 3 बार एक चम्मच शहद का सेवन करे | सोने से पहले एक चम्मच शहद जरुर ले |
Have 2-3 tablespoon of pure honey and if required then 1 glass of warm water before going to bed.

8. लहसुन और सरसों के तेल से मालिस (garlic and mustard oil massage)

लहसुन को सरसों के तेल बहुत हे लाभकारी है और वायरल fever में काफी काम आता है | लहसुन को सरसों के तेल को गर्म करके गले एवं छाती की मालिस करने से स्वांस लेने में होने वाली रुकावट दूर होती है | दो चार लह्सुन के दाने से छिलका निकल ले , फिर उसे हलके से कूच कर छोटे छोटे दाना में बदल दे | 4 या 5 चम्मच सरसों के तेल को किसी बर्तन में डाल ले फिर उसमे लहसुन के टुकडो को डाल कर लाल होने तक गर्म करे | रोजाना सोने से पहले उसके गर्म तेल से अपनी छाती एवं गर्दन की massage करे |

9. ठडे पानी या ठंडी चीजो से परहेज (avoid cold things)

ठन्डे पानी के कारण या कोई भी ठंडी चीज जैसे सीतल पेय, कुल्फी, आइसक्रीम अदि का इस्तेमाल से हमारे गले में सिकुड़न होने लगता है, अत इन सब चीजो का सेवन कम कर दे